धौलपुर जिले के सैंपऊ उपखंड की ग्राम पंचायत नुनहेरा के छह गांवों की करीब 2000 से ज्यादा आबादी बारिश और खराब मौसम में खतरे के साए में जी रही है. ये गांव पार्वती नदी के किनारे बसे हैं और गढ़ी चटोला के पास बने एनीकट के कारण यहां हर साल भारी जलभराव हो जाता है.
आरी, मढ़ैया, भूरा का पुरा, बघेलों का पुरा, महंत का अड्डा और पंछी का पुरा जैसे गांवों के लोग बारिश में 15 से 20 फीट गहरे पानी से होकर पास के कस्बे तसीमों पहुंचते हैं. सीधा रास्ता 700 मीटर का है लेकिन पुल या रपट नहीं होने के कारण उन्हें 10 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है.
बारिश के पानी से हुआ जलभराव
इस दूरी से बचने के लिए ग्रामीणों ने ट्यूब खटोले बना रखे हैं. हर परिवार ने चारपाई के नीचे ट्यूब बांधकर नदी पार करने की जुगाड़ बना रखी है. इन खटोले को ताले में रखकर सुरक्षित किया जाता है ताकि कोई और उसका इस्तेमाल न कर सके.
बच्चे स्कूल जाने के लिए, मरीज अस्पताल पहुंचने के लिए और लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इन्हीं खटोले पर सफर करते हैं. ग्रामीणों ने नदी के दोनों किनारों पर मजबूत लोहे का तार भी बांध रखा है जिससे बैलेंस बनाकर पार किया जा सके.
जान जोखिम में डालकर नदी पार करते लोग
सरपंच रेशम देवी बताती हैं कि यह समस्या करीब 12 साल से बनी हुई है. कई बार मांग उठाने के बाद भी अब तक रपट नहीं बनी. हाल ही में मुख्यमंत्री को भी लिखित में इसकी जानकारी दी गई है.
उमेश मिश्रा