डॉ रक्षंदा जलील 5वें वाणी फाउंडेशन विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार से सम्मानित

जयपुर के डिग्गी पैलेस के दरबार हॉल में इतिहासकार डॉ रक्षंदा जलील को 5वें वाणी फाउंडेशन विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार से नवाजा गया.

जयपुर के डिग्गी पैलेस में रक्षंदा जलील का सम्मान समारोह
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

जयपुर: स्थानीय डिग्गी पैलेस के दरबार हॉल में वाणी प्रकाशन और जयपुर बुक मार्क की ओर से तथा टीमवर्क आर्ट्स के सहयोग से इतिहासकार डॉ रक्षंदा जलील को 5वें वाणी फाउंडेशन विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार से नवाजा गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत में नॉर्वे के राजदूत एचई हैंस जैकब फ्राइडनलैंड और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की सदस्य वाणी त्रिपाठी टिक्कू मौजूद थीं. फ्राइडनलैंड ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा, ''नॉर्वे के लिए, एक छोटी भाषा का देश होने के नाते, अनुवाद और उत्कृष्ट अनुवादक महत्वपूर्ण है, इसलिए हमारे लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का हिस्सा होना मूल्यवान है, यह पुरस्कार वर्तमान के महान अनुवादकों के काम को स्वीकार करते हुए भविष्य के अनुवादकों को प्रोत्साहित करता है. मैं अनुवाद के माध्यम से अधिक अंतर-भाषाई आदान-प्रदान की आशा के साथ विजेता को बधाई देता हूं.''रक्षंदा जलील प्रखर लेखक, आलोचक और साहित्यिक इतिहासकार हैं. उन्होंने तीन लघु कथाओं और आठ अनुवादों का सम्पादन किया है. रक्षंदा जलील ने ‘प्रोग्रेसिव राइटर्स मूवमेंट एज रिफ्लेक्टेड इन उर्दू’ पर पीएचडी की.  इनके काम में डॉ राशिद जहाँ की आत्मकथा और इन्तज़ार हुसैन की लघुकथाओं का एक अनुवाद शामिल हैं. इनका निबन्ध संग्रह ‘इनविज़िबल सिटी’ जोकि दिल्ली के प्रसिद्ध स्मारकों पर आधारित है, पाठकों द्वारा बहुत पसन्द किया गया. वह ‘हिन्दुस्तानी आवाज़’ के नाम से एक संस्था भी चलाती हैं, जो हिन्दू-उर्दू साहित्य एवं संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के लिये समर्पित है.डॉ रक्षंदा जलील ने पुरस्कार प्राप्त करने पर कहा, "इस तरह की प्रख्यात जूरी से वाणी फाउंडेशन विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार प्राप्त करना बहुत गर्व और सम्मान की बात है. मेरा पहला अनुवाद, प्रेमचंद की लघु कहानियों का एक संग्रह 1992 में प्रकाशित हुआ था. तब से एक लंबी और समृद्ध यात्रा रही है. यह एक सुखद अनुभव है कि अनुवाद देश भर के विभिन्न साहित्यिक मंचों में सम्मान और प्रशंसा प्राप्त कर रहा है और इसमें प्रकाशकों का बड़ा योगदान हैं."नमिता गोखले ने कहा, ‘रक्षंदा जलील हमारे सबसे प्रतिभाशाली, प्रतिबद्ध लेखकों और अनुवादकों में से एक हैं. उर्दू महिला लेखिका से लेकर फणीश्वर नाथ 'रेणु’ तक की उनकी अनुवाद की सीमा बहुत व्यापक है. हिंदी, उर्दू, हिंदुस्तानी और भारतीय मूल के साहित्य पर उनके दृष्टिकोण भारतीय साहित्यिक समझ के बड़े कोष के लिए बहुत मूल्यवान हैं.'' टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजोय रॉय ने कहा, ''प्रत्येक वर्ष वाणी फाउंडेशन और टीमवर्क आर्ट्स वाणी फाउंडेशन विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार प्रदान करता है. यह पुरस्कार भारतीय साहित्यिक परिदृश्य में शुरुआत से ही विविधता को संबोधित करता रहा है और इसने कई प्रतिष्ठित लेखकों और कवियों के कामों को चिन्हित किया है.''  जयपुर बुकमार्क की निदेशक नीता गुप्ता ने कहा, "जयपुर बुकमार्क के 7वें संस्करण में अनुवाद हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. हम नॉर्वेजियन नाटककार इबसेन के नाटकों को हिंदी में लोकार्पित कर रहे हैं और हमारे पास अनुवाद पर केन्द्रित सत्र भी हैं. हम दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा भी कर रहे हैं, जिसमें  वाणी फाउंडेशन विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार और रोमेन रोलैंड पुरस्कार शामिल हैं.''सांस्कृतिक आलोचक और इस पुरस्कार के जूरी मेम्बर संदीप भूतोड़िया ने कहा, ''भाषा वह माध्यम है जो किसी देश को उसके समाज से जोड़ती है और देश की एकता और समानता के लिए विभिन्न भाषाओं को आपस में जोड़ती है. इस पुरस्कार का उद्देश्य भाषाओं के विस्तार पर काम करना है, और आज के समय में हमारे समाज को इस प्रकार के कदमों की आवश्यकता है.'' इस मौके पर वाणी फाउंडेशन के अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी ने कहा कि वाणी फाउंडेशन अपनी साहित्यिक गतिविधियों के अलावा अनुवाद को विशेष  महत्त्व इसलिए देता है क्योंकि दुनिया की सभ्यताओं और संस्कृतियों के बीच संवाद का माध्यम सिर्फ अनुवाद ही है. भारतीय सभ्यता, भारतीय संस्कृति और भारत की भाषाओं के बीच संवाद होना और विश्व की भाषाओं  के साथ भारतीय भाषा का कदम ताल होना अपने आपमें इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमारी सभ्यता, संस्कृति और कला का विकास होता है. याद रहे कि यह पुरस्कार विशेष रूप से उन अनुवादकों को दिया जाता है जिन्होंने निरन्तर लेखन व अनुवाद के माध्यम से साहित्यिक समृद्धि के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है. यह पुरस्कार न केवल अनुवादक व लेखक के लिए एक सार्वजनिक मंच तैयार करता है बल्कि पुरस्कार प्राप्त करने वाले विजेता व उसके योगदान को भाषाओं के माध्यम से वसुधैव कुटुंबकम की भावना को पोषित करता है. उल्लेखनीय है कि साल 2016 में प्रथम वाणी फ़ाउंडेशन ‘डिस्टिंग्विश्ड ट्रांसलेटर अवार्ड’ मलयालम कवि अत्तूर रवि वर्मा को प्रदान किया गया था. वर्ष 2017 में यह पुरस्कार प्रख्यात अनुवादक, कवयित्री, लेखिका और आलोचक डॉ अनामिका को दिया गया. 2018 में सांस्कृतिक, इतिहासज्ञ और अनुवादक डॉ रीता कोठारी और वर्ष 2019 में कवि, कथाकार, अनुवादक और चित्रकार तेजी ग्रोवर को इस पुरस्कार से नवाज़ा गया था. विजेता को इस पुरस्कार के तहत एक लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि के साथ सम्मान चिन्ह प्रदान किया जाता है.

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