देवी चित्रलेखा का नाम भारत के सबसे कम उम्र के कथावाचकों में शुमार है. अपने विचारों और भक्ति गीतों के जरिए वो इतनी कम उम्र में ही एक बड़ी आध्यात्मिक गुरु बन चुकी हैं. सोशल मीडिया पर इनके रील्स खूब वायरल होते हैं और लाइक किए जाते हैं. चित्रलेखा ने 'साहित्य आजतक 2024' के मंच पर सनानत धर्म के प्रचार और कथावाचकों के काम पर सवाल उठाने वाले आलोचकों को जवाब दिया.
साहित्य आजतक के मंच पर उनसे कई सवाल हुए. इसी क्रम में उनसे पूछा गया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 'बंटेंगे तो कटेंगे' जैसी बातें कहते हैं. इस तरह की बातों और नारों पर आपका क्या कहना है?
देवी चित्रलेखा ने बेझिझक इसका जवाब देते हुए कहा, 'मैं इन बातों से पूरी तरह सहमत हूं. एक सच्चा हिंदू कभी हिंसा नहीं करेगा. कभी लोगों को खिलाफ जहर नहीं उगलेगा. लेकिन अगर कोई हमारा गला काटने आए तो खुद को बचाना भी तो हमारी जिम्मेदारी है. गरीब तबके के लोगों को पैसों और कीमती चीजों का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. यह एक चिंता का विषय है और हमें इस बारे में सोचना होगा. अगर कोई धर्म को लेकर पदयात्रा कर रहा है तो उसका काम धर्म को बचाना है, न कि हिंसा भड़काना.'
धर्म के प्रचार का सही तरीका क्या है?
देवी चित्रलेखा ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, 'जीवन में हर इंसान सुख की कामना करता है. लेकिन क्या हम हर हाल खुश रह पाते हैं? नहीं. जीवन में कुछ न कुछ दिक्कत चलती रहती है. यहीं धर्म के प्रचार की जरूरत महसूस होती है. धर्म प्रचार का आशय ही लोगों को एक ऐसी दिशा दिखाना कि चाहे उनके जीवन में कितना भी बड़ा दुख क्यों न आ जाए, उनके चेहरे पर हंसी हमेशा बनी रहेगी. जो आपको भटकने न दे, हमेशा संभालकर रखे. बस वही धर्म है. मैं हमेशा कहती हूं कि एक लाइब्रेरी में रखी गीता और कुरान आपस में नहीं लड़ती हैं. लेकिन जो उनके लिए लड़ते हैं, वो उन्हें कभी पढ़ते नहीं हैं.'
हालांकि देवी चित्रलेखा ने यह भी कहा कि वह केवल एक कथावाचक हैं और उनका काम एक मैसेंजर का है जो शास्त्रों में लिखी बातों को सरलता से लोगों तक पहुंचाता है. जब उनसे पूछा गया है कि वो राम की मैसेंजर हैं या कृष्ण की तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'राम और कृष्ण दोनों में कोई अंतर नहीं है. राम और कृष्ण एक ही हैं. एक ने हमें मर्यादा सिखा दी तो दूसरे ने चंचलता. मेरे लिए दोनों में कोई अंतर नहीं है. मैं दोनों का ही प्रचार करती हूं.'
उन्होंने आगे कहा, 'हम राम और कृष्ण के नाम पर ही खाते हैं और उनके कृपा से ही हमारा घर चलता है. हमारा समाज भी उसी से चलता है. अगर इसे कोई धंधा समझता है तो वो गलत है. कथा के जरिए हमें जो पैसा मिलता है, वो जरूरी चीजों में खर्च होता है. देश-विदेश में जब हम कथा करने जाते हैं तो साथ में कई लोगों की टीम होती है. उनका घर फिर कैसे चलेगा. हम और भी कई तरह की समाज सेवा करते हैं. इस बारे में कोई जिक्र ही नहीं करता है.'
aajtak.in