Sahitya AajTak 2022: साहित्य आजतक के मंच पर पहले दिन 'मैं समय हूं' सेशन में वॉयस ओवर आर्टिस्ट हरीश भिमानी से तमाम बातें हुईं. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और लता मंगेशकर के जीवन पर 'अजीब दास्तान है ये…' लिखने वाले हरीश भिमानी ने अपने जीवर और संघर्ष से जुड़े कई किस्से साझा किए.
हरीश भिमानी ने कहा कि मैं समय हूं, मैं कल भी था, आज भी हूं. उन्होंने कहा कि तमाम लोग मेरे पास अपने बच्चों को लेकर वॉयस ओवर इंडस्ट्री में करियर बनाने की सलाह लेने आते हैं. इसके लिए मैं कहना चाहता हूं कि इसके लिए आपको एक भाषा अपनानी होगी. उन्होंने कहा कि अगर आप भाषा को धर्म का दर्जा देंगे तो उसके प्रति सम्मान रखेंगे.
वॉयस ओवर आर्टिस्ट बनने के लिए कुछ भी सोचा नहीं था. इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इसके लिए एक जज्बा जरूर था. हरीश ने कहा कि मैंने मुंबई से एमबीए किया है. वहां कॉलेज में सेमिनार होते रहते थे, तो माइक को संभालने की जिम्मेदारी होती थी. उस समय फोटोग्राफी करता था, आर्टिकल लिखता था. इसके बाद रेडियो में जाने लगा.
एक बार रेडियो के लिए ऑडिशन हो रहा था, तो लंबी लाइन लगी हुई थी. वहां जाकर ऑडिशन देने गया. वहां एक लंबे कद के लड़के ने मेरी मदद की. इसके 18 साल बाद एक जगह एक्टिंग के ऑडिशन के समय वही लड़का मिला, जो मुकेश खन्ना था, तब तक काफी नाम हो चुका था.
हरीश ने सुनाया बचपन का किस्सा, रेडियो से लगा था करंट
हरीश ने बचपन की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार मां से पूछा कि रेडियो के अंदर से आवाजें आती हैं, ये लोग कितना अच्छा बोलते हैं, यानी रेडियो के अंदर छोटे-छोटे लोग होते हैं, लेकिन मां से पूछा कि जब पिताजी रेडियो बंद करते हैं तो ये छोटे-छोटे लोग जाते कहां हैं. इसके बाद एक दिन दो लोगों की बातचीत का प्रोग्राम आ रहा था. इस पर सोचा कि इन्हें रेडियो से निकालकर इनसे बातें करूं. इसके बाद रेडियो को खोला तो उसमें हाथ लगाते ही करंट लग गया.
'पहले तीन साल में होता था एक ऑडिशन, आजकल दिन में चार-पांच हो जाते हैं'
हरीश भिमानी ने कहा कि आजकल दिन में चार-पांच ऑडिशन होते हैं. पहले तीन साल में एक ऑडिशन होता था. एक बार जब ऑडिशन दिया तो मेरा चयन न्यूज और म्यूजिक दोनों के लिए हो गया. मेरी जिंदगी में इस बदलाव में शायद किस्मत का भी साथ रहा है. हरीश ने बताया कि मुझे पहले नहीं पता था कि मुझे करना क्या है. धीरे-धीरे रेडियो पर छोटे--छोटे प्रोग्राम करने शुरू कर दिए. इसके बाद सिलसिला चल निकला.
वॉयस रिकॉर्डिंग की जरूरत को देख शुरू की वेबसाइट
इसके बाद लता जी ने बुलाया और वहां से एक और रास्ता निकला. हरिहरन और मैंने पहली बार स्टेज पर एकसाथ कदम रखा था. उन्होंने कहा कि लोग यही जानते हैं कि हरीभ भिमानी यानी महाभारत का समय. एक समय सोचा कि वॉयस रिकॉर्डिंग की जरूरत केवल देश में ही है, इसके बाद एक वेबसाइट शुरू की, जिसके माध्यम से आज 38 देशों तक काम फैल चुका है. इस दौरान उन्होंने डॉ. राही मासूम रजा के साथ के प्रसंग भी सुनाए. कार्यक्रम के अंत में हरीश भिमानी ने सुनाया- मैं समय हूं.. मैं अनंत हूं... विस्तार से सुनाया.
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