राजनीति में कार्टून का क्या महत्व, पढ़ें पॉलिटिकल कार्टूनिंग पर पहली PhD

राजनीतिक खबरों में कार्टून का के महत्व से आप वाकिफ होंगे लेकिन इस विषय की गहराई में जाएं तो किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है. लेकिन अब भारतीय राजनीति में कार्टून के महत्व को समझाने के लिए एक मौलिक रिसर्च किताब के तौर पर आपके सामने है.

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जानिए क्या मतलब है देश में पोलिटिकल कार्टूनिंग का जानिए क्या मतलब है देश में पोलिटिकल कार्टूनिंग का

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2017,
  • अपडेटेड 3:30 PM IST

राजनीतिक खबरों में कार्टून का के महत्व से आप वाकिफ होंगे लेकिन इस विषय की गहराई में जाएं तो किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है. लेकिन अब भारतीय राजनीति में कार्टून के महत्व को समझाने के लिए एक मौलिक रिसर्च किताब के तौर पर आपके सामने है.

 

टेलीवीजन पत्रकार डॉ प्रवीण तिवारी भारतीय राजनीति में कार्टून के महत्व पर महत्वपूर्ण रिसर्च करते हुए देश में पहली बार इस विषय पर डीएवीवी इंदौर से 2007 में पीएचडी की जिसे किताब के रूप में पेश किया है.

इस मौलिक रिसर्च को किताब के रूप में पाठकों तक पहुंचाने के लिए किताब के प्रस्तावना को मशहूर कार्टूनिस्ट स्वर्गीय सुधीर तैलंग ने लिखा है. डॉ प्रवीण तिवारी का कहना है कि सुधीर तैलंग खुद इस विषय पर किताब लिखना चाहते थे और इसी से प्रेरणा लेते हुए उनके संकल्प को पूरा करने की कोशिश की है.

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अपनी किताब में प्रवीण तिवारी ने स्व. आर के लक्ष्मण, स्व. सुधीर तैलंग, उन्नी, शेखर गुरेरा, इस्माइल लेहारी, राजेन्द्र ढोडापकर जैसे महान कार्टूनिस्टों का साक्षात्कार प्रकाशित कर विषय पर महत्वपूर्ण नजरिया पेश करने की कोशिश की है. प्रवीण ने पहली बार देश में कार्टून की अहमियत और खास तौर पर राजनीतिक कार्टून के इतिहास का ताना बाना भी रोचत ढंग से पाठकों के लिए पेश किया है.

 

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