अब इस देश ने महिलाओं के खतना को माना अपराध, होगी तीन साल की सजा

सूडान में अभी भी ज्यादातर महिलाएं खतना के दर्द से गुजरती हैं. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में महिलाओं की सेहत को लेकर चिंता जताई है.

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सूडान में खतना के खिलाफ बना कानून सूडान में खतना के खिलाफ बना कानून

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2020,
  • अपडेटेड 6:14 PM IST

सूडान में फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) यानी महिलाओं के खतना को अब अपराध की श्रेणी में रखा गया है और सजा के तौर पर तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है. महिलाओं के अधिकारों के लिए आंदोलन चलाने वाले संगठनों ने इसे महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरूआत बताया है. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के एक डेटा के मुताबिक यहां 10 में से नौ महिलाएं खतना के दर्द से गुजरती हैं जो कि सेहत के लिए बेहद खतरनाक है.

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सूडान की सरकार ने अपने आपराधिक कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी, जिसमें कहा गया कि जो कोई भी फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन करता है उसे तीन साल की सजा के साथ जुर्माना भी देना पड़ेगा. यहां के महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि इस सजा से FGM को खत्म करने में मदद मिलेगी. हालांकि इन संगठनों का कहना है कि अभी भी लोगों की मानसिकता को बदलना आसान काम नहीं है क्योंकि लोग इसे एक ऐसी पारंपरिक प्रथा मानते हैं, जिसे बेटियों की शादी के लिए निभाना जरूरी है.

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अफ्रीका में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ की क्षेत्रीय निदेशक फैजा मोहम्मद ने कहा, 'सबसे ज्यादा महिलाओं का खतना सूडान में ही होता है. अब खतना करवाने वाले लोगों को निश्चित रूप से सजा देनी जानी चाहिए ताकि लड़कियों को इस अत्याचार से बचाया जा सके.'

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फैजा का कहना है, 'FGM के खिलाफ बना कानून काफी हद तक महिलाओं की रक्षा करेगा लेकिन इसे लागू करने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि जो लोग इस प्रथा में विश्वास करते हैं वो इसके खिलाफ शिकायत करने नहीं जाएंगे.'

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