Women's health: 50 की उम्र में रहना चाहती हैं हेल्दी? रोजाना खाना शुरू करें ये एक चीज

उम्र बढ़ने साथ-साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं. 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते मेनोपॉज और अन्य कारणों की वजह से महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 7:33 AM IST

महिलाएं जैसे-जैसे 50 की उम्र में पहुंचती हैं उनके शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, ऐसे समय में महिलाओं के शरीर को पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इस उम्र में अगर महिलाएं अपने खानपान और पोषण का ख्याल रखें तो इससे उन्हें आगे चलकर किसी भी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता. साथ ही वह एक एक्टिव लाइफ भी जी सकती हैं. 50 की उम्र में महिलाओं के लिए जरूरी है कि वह पर्याप्त मात्रा में डेली बेसिस पर कुछ पोषक तत्वों को अपनी डाइट में शामिल करें.

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इस उम्र में महिलाओं को मेनोपॉज के साथ ही कई तरह के शारीरिक बदलावों का सामना करना पड़ता है, साथ ही 50 की उम्र तक आते-आते महिलाओं के बॉडी फैट में भी वृद्धि होती है. इस दौरान महिलाओं की स्किन इलास्टिसिटी कम होने लगती है और रिंकल्स, बालों का सफेद होना जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. महिलाओं के शरीर में मसल मास भी कम होने लगता है जिससे महिलाएं खुद को कमजोर महसूस करने लगती हैं. ऐसे में इन सभी दिक्कतों से बचने के लिए महिलाओं को इस दौरान पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए जिसमें से एक है दलिया.

दलिया को ब्रोकन व्हीट के नाम से भी जाना जाता है और यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. 50 की उम्र में महिलाओं को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए. आइए जानते हैं दलिया के फायदे-

वजन कंट्रोल करने में मदद- 50 की उम्र में महिलाएं अपने शरीर में महत्वपूर्ण बदलावों को अनुभव करती हैं, जिसमें वजन बढ़ना भी शामिल है, इसलिए ऐसी चीजों को शामिल करना जरूरी है जो हेल्दी हो और अनावश्यक वजन बढ़ाने में योगदान न करें.

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दलिया में फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है और इसे खाने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है. एक रिसर्च के मुताबिक,  जो महिलाएं रोजाना साबुत अनाज का सेवन करती हैं उनका वजन मेंटेन रहता है.

कब्ज दूर करे- ऐसा देखा गया है कि मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का लेवल कम होने की वजह से महिलाओं को कब्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके कारण महिलाओं के पेल्विक फ्लोर की मसल्स भी काफी कमजोर होने लगती हैं.

फाइबर से भरपूर होने के साथ ही दलिया आंतों और पाचन तंत्र से विषाक्त पदार्थों और अपशिष्ट को बाहर निकालने का काम करता है जिससे कब्ज का खतरा कम होता है. फाइबर की मात्रा ज्यादा होने के कारण, दलिया गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग के लक्षणों जैसे पेट दर्द, मतली, गैस बनना और सूजन को कम करने के लिए भी फायदेमंद होता है.

मसल मास बढ़ाए- उम्र बढ़ने के साथ-साथ मसल मास में 3 से 8 फीसदी की गिरावट होती है और 50 की उम्र के बाद ये रेट और भी ज्यादा बढ़ने लगता है. दलिया में प्रोटीन और विटामिन्स की मात्रा काफी ज्यादा होती है जो मसल मास को बढ़ाने में मदद करता है.

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण- दलिया में एक बीटाइन नाम का मेटाबॉलिक कंपाउंड पाया जाता है जो शरीर में होने वाली इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद करता है.

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव- दलिया में फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है जिससे इसे खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम हो सकता है. कई रिसर्च के मुताबिक, दलिया खाने से कोलन और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है.

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