इन 8 धार्मिक स्थलों को चमकाएगी यूपी सरकार, बढ़ेंगे पर्यटक

उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में लागू की गई नई पर्यटन नीति के तहत प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों को भी विकसित किया जाएगा. इस परियोजना का मकसद प्रदेश में देश और विदेश के सैलानियों को आकर्षित करना है. इससे ना सिर्फ राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे.

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उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश

शिल्पी सेन

  • लखनऊ,
  • 22 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:23 PM IST

उत्तर प्रदेश में नई पर्यटन नीति के तहत राज्य के आठ मशहूर धार्मिक स्थलों को नए सिरे से विकसित किया जाएगा. दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में पर्यटन नीति 2022 को मंजूरी दी है. इसके तहत राज्य के बाकी टूरिस्ट प्लेसेस के साथ ही आठ धार्मिक और आध्यात्मिक टूरिज्म सर्किट को भी विकसित किया जाना है.

इसके तहत रामायण, महाभारत, शक्तिपीठ, कृष्ण, बुद्ध, जैन और सूफ़ी सर्किट से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नया रूप देने की तैयारी है. सरकार का कहना है कि रामायण और महाभारत सर्किट जैसे धार्मिक पर्यटन स्थलों को एक परिपथ के तौर पर विकसित करने से आध्यात्मिक पर्यटन को ना सिर्फ देश बल्कि दुनियाभर में लोकप्रियता हासिल होगी.

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पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश
सैलानियों को आकर्षित करने के लिए इन स्थलों में नए सिरे से विकास कार्य किया जाएगा. इन धार्मिक और आध्यात्मिक जगहों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सैलानी आते हैं. इन जगहों के विकास के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा. इतना ही नहीं इन जगहों की यात्रा के दौरान लोगों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी.

इन स्थलों को दिया जाएगा नया रूप

जानकारी के मुताबिक, रामायण सर्किट में सीता और राम से जुड़े स्थलों को शामिल किया जाएगा. इसमें अयोध्या, बिठूर, चित्रकूट और अन्य स्थल भी होंगे. महाभारत सर्किट में हस्तिनापुर, कांपिल्य, गोंडा, लाक्षागृह जैसे स्थल शामिल होंगे. कृष्ण सर्किट में मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव और कृष्ण से जुड़े अन्य स्थल, शक्तिपीठ सर्किट में विंध्यवासिनी देवी, अष्टभुजा, देवीपाटन, नैमिशारण्य, ललिता देवी, सहारनपुर में शाकंभरी देवी और अन्य स्थलों को शामिल किया जाएगा. बुद्ध सर्किट में कपिलवस्तु, कुशीनगर, श्रावस्ती, सारनाथ, कौशाम्बी समेत कुछ स्थल शामिल होंगे. 

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इसके अलावा जैन सर्किट में देवगढ़, हस्तिनापुर, दिगम्बर जैन मंदिर रामनगर और सूफ़ी सर्किट में कबीर की जन्मस्थली वाराणसी, निर्वाण स्थली, बस्ती ज़िले का मगहर, संत कबीरनगर के स्थल होंगे. वहीं, गोरखपुर, आगरा के बटेसर जैसे स्थलों को आध्यात्मिक सर्किट में शामिल किया जाएगा. ‘नयी पर्यटन नीति’ के तहत इन स्थानों पर हेरिटेज होटल (heritage hotel),रिसॉर्ट (resort), थीम बाज़ार, टूरिस्ट इन्फ़र्मेशन सेंटर, वेलनेस सेंटर, ऑल सीज़न कॉटिज और दूसरी सुविधाओं का विकास किया जाएगा.इन सभी धार्मिक स्थलों को टूरिज्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा.

उत्तर प्रदेश में इन धार्मिक स्थलों को विकसित करने के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शिता है. यहां व्यवसाय और रोज़गार की अपार संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री की तरफ से इस परियोजना को मंजूरी दी है. इस पर्यटन नीति के तहत अयोध्या की चौदह कोसी परिक्रमा और बरसाने की होली जैसे हर एक छोटे-बड़े आयोजन की जानकारी पर्यटकों को उपलब्ध कराई जाएगी.

 

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