Sponsored : भोले की नगरी बनारस का हर रंग है रंगीला...

एक ऐसा शहर देख‍िए जहां भारतीय संस्कृत‍ि का दर्शन एक ओर आपको मोक्ष की ओर प्रेरित करता है तो वहीं स्वाद और सौंधा जीवन यहीं बसने पर मजबूर करता है...

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भाेले शंकर की नगरी बनारस भाेले शंकर की नगरी बनारस

वन्‍दना यादव

  • नई दिल्‍ली,
  • 28 जुलाई 2016,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

भारत में ऐसा कौन सा राज्य है जो आलीशान होने के साथ-साथ रहस्यमयी भी है. कौन सा ऐसा राज्य है जिसकी संस्कृति और इतिहास दोनों ही बहुमूल्य है? कौन धार्मिक और पौराणिक स्थलों का गवाह है? यह है उत्तर प्रदेश.

कलाकारों का गढ़ है ये प्रदेश
भारत में कहां आपको शानदार चिकनकारी, खूबसूरत बनारसी साड़ियां और नाजुक पट्टी का काम मिलेगा. आपका जवाब होगा उत्तर प्रदेश. देश के कौन से राज्य में आपको जटिल बुनाई वाले सिल्क के कालीन, नक्काशीदार लकड़ी और पीतल का काम, लाजवाब चाट और बनारसी पान मिलेगा.

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इसका जवाब उत्तर प्रदेश के अलावा कुछ हो ही नहीं सकता. इस पर तड़का लगाता है यहां के लोगों का प्यार और लखनवी अंदाज, तहजीब, नजाकत और अदाएं. यह सब उत्तर प्रदेश को एक अलग और अनोखा राज्य बनाता है.

राजवंशों की विरासत का हिस्सा
भौगोलिक क्षेत्र और जनसंख्या, दोनों के ही आधार पर उत्तर प्रदेश भारत के बड़े राज्यों में से एक है. यूपी में बहुत से राजाओं ने शासन किया है और इन राजवंशों की वजह से ही यहां की सांस्कृतिक विरासत बहुत धनी है. ऐतिहासिक महत्व के बहुत से स्मारक आपको यहां मिल जाएंगे.

इसे कह सकते हैं धर्मस्थली
यूपी के बहुत से शहरों में अलग-अलग धर्मों के श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. पूरे यूपी में मंदिर, मस्जिद और जैन एंव बुद्धों के धार्मिक स्थल फैले हुए हैं. कृष्ण जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन, राम जन्मभूमि अयोध्या, गंगा-यमुना और सरस्वती नदियों का संगम स्थल प्रयाग, शिव भक्तों का वाराणसी उत्तर प्रदेश का अहम हिस्सा है.

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सारनाथ चार तीर्थ स्थलों में से एक है जहां गौतम बुद्ध के अनुयायी हर साल बड़ी संख्या में आते हैं. सारनाथ जैनियों के ग्यारहवें जैन तीर्थंकर का जन्म स्थान भी है. यूपी के मस्जिद, किले और स्मारक यहां के परिदृश्य में चार चांद लगाते हैं.

सात अजूबों में से एक यहीं है मौजूद
आगरा और फतेहपुर सीकरी में मुगलों का शक्तिशाली शासन था. आगरा में बना 'ताजमहल' विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है. इसे मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल के लिए बनाया था. साल में लाखों यात्री ताजमहल देखने आते हैं. यूपी की राजधानी लखनऊ और दूसरे शहरों में प्राचीन काल से लेकर मुगलों के समय तक बहुत से शासकों ने राज किया है.

मेरठ में भारत की स्वाधीनता संग्राम की पहली लड़ाई लड़ी गई थी. यूपी में विचारक, दार्शनिक, शासक सिर्फ रहते ही नहीं थे बल्कि यहां उन्होंने अपने ज्ञान और बुद्धिमता का प्रसार भी किया. मंदिर, मस्जिद, महलों का निर्माण भी किया, जिनकी झलक पाने को पर्यटक भारी संख्या में यूपी की तरफ आकर्षित होते हैं.

80 के काशी में मिलेंगे भोले
यूपी काफी समय से पर्यटन का आदर्श स्थल रहा है. लाखों पर्यटक वाराणसी, मथुरा और अयोध्या आते हैं क्योंकि यह भारत के पवित्र स्थलों में से एक माने जाते हैं. मंदिरों का शहर वाराणसी, 'काशी' और 'बनारस' के नाम से भी जाना जाता है. 'काशी' शब्द की उत्पत्ति 'कश' से हुई है, जिसका अर्थ है 'चमकना'. शास्त्रों में काशी का जिक्र बहुत बार हुआ है और इसे हिंदूधर्म का उत्पत्ति स्थल भी कहा जाता है. हिंदुओं के सात पवित्र स्थलों में वाराणसी भी एक है. लेकिन यहां सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि दूसरे धर्मों के लोग भी आते हैं. इसे भारत की 'धार्मिक राजधानी' भी कहा जाता है. वाराणसी में लाखों लोग अपने पाप धोने आते हैं.

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वाराणसी का 'काशी विश्वनाथ मंदिर' विश्वनाथ ज्योतिर्लिंगों का घर है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यह हमारे सांस्कृतिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों का अवतार है. आप किसी भी मौसम में यहां आ सकते हैं लेकिन मानसून में यहां आने का धार्मिक महत्व है. महाशिवरात्रि यहां हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. हनुमान के संकट मोचन मंदिर में हजारों बंदरों को देखा जा सकता है. भगवान हनुमान की मूर्ति के सामने रोज हजारों श्रद्धालु हनुमान चालीसा पढ़ते हैं. दुर्गा मंदिर के पास स्थित तुलसी मानस मंदिर भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को समर्पित है.

वाराणसी प्राचीन काल से शिक्षा का केंद्र रहा है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी अपने संस्कृति, फिलॉसफी और आर्ट्स फैकल्टी के लिए जाना जाता है. गंगा नदी के किनारे बसे होने के कारण इस शहर में बहुत से घाट हैं. ये घाट इस शहर के वातावरण में चार चांद लगाते हैं. इन घाटों की वजह से वाराणसी बहुत ही रंगीन नजर आता है. जीवन और मृत्यु से जुड़े रस्मों को इन घाटों के पास निभाया जाता है. पर्यटक यहां बोट पर बैठकर सारे घाटों को बारी-बारी देख सकते हैं.

गंगा नदी के किनारे यहां करीब 84 घाट है. इसी कारण वाराणसी को 'घाटों का शहर' कहा जाता है. घाटों में अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और तुलसी घाट प्रमुख हैं. आपकी वाराणसी यात्रा बिना गंगा आरती देखे पूरी हो ही नहीं सकती. आरती रोज सुबह और शाम को घाट पर होती है. यह शहर के देवत्व और पवित्रता को बढ़ाता है, जिससे आपको असीम शांति का अनुभव होता है. मकर संक्रांति के अवसर पर बहुत से लोग मृत्यु के बाद मोक्ष की तलाश में यहां गंगा स्नान भी करते हैं.

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यहां 'गंगा महोत्सव' एक त्योहार की तरह मनाया जाता है, जो इस शहर के आकर्षण का केंद्र भी है. इस महोत्सव के दौरान शास्त्रीय जिससे यह जगह जीवंत हो उठता है. पांच दिन तक चलने वाला यह महोत्सव आस्था और संस्कृति का संदेश देता है. कार्तिक की पूर्णिमा को लाखों श्रद्धालु गंगा नदी में दीया बहाते हैं. यह दृश्य आपके वाराणसी की यात्रा को यादगार बना देगा.

इस वीडियो में देखें बनारस के कुछ रंग...

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