स्ट्रोक का सामना कर चुके मरीजों में डिमेंशिया होने की अधिक संभावना रहती है. विश्वस्तर पर लगभग 1.5 करोड़ लोग सालाना स्ट्रोक से ग्रस्त होते हैं. डिमेंशिया से पांच करोड़ लोग पीड़ित हैं, यह संख्या अगले 20 वर्षों में लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है. एक्सेटर मेडिकल स्कूल के नए अध्ययन में इस बात सामने आई है.
हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, स्ट्रोक या सेरेब्रोवास्कुलर एक्सीडेंट (सीवीए) के परिणामस्वरूप दिमाग में अचानक रक्त की कमी या दिमाग के भीतर रक्तस्राव होता है, जिसके परिणामस्वरूप न्यूरोलॉजिकल फंक्शन की हानि होती है.
स्ट्रोक के लक्षण-
स्ट्रोक के कुछ चेतावनी संकेतों में बांह, हाथ या पैर में कमजोरी होने लगती है. शरीर के एक तरफ धुंधलापन, नजर में यकायक कमजोरी, खासकर एक आंख में धुंधलापन, बोलने में अचानक कठिनाई, समझने में असमर्थता, चक्कर आना या संतुलन का नुकसान और अचानक से भारी सिरदर्द आदि.डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, स्ट्रोक दुनिया भर में प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं में से एक है, क्योंकि पिछले कुछ दशकों में भारत में इसका बोझ खतरनाक दर से बढ़ रहा है. इस स्थिति को हल करने की तत्काल आवश्यकता है और यह केवल सभी जनसांख्यिकीय समूहों के बीच अधिक प्रभावी सार्वजनिक शिक्षा के माध्यम से किया जा सकता है.
स्ट्रोक से बचने के लिए ये करें-
- उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें.
- सप्ताह में 5 बार मध्यम व्यायाम करें.
- फल सब्जियां और कम सोडियम वाला आहार खाएं.
- कोलेस्ट्रॉल को कम करें.
- स्वस्थ बीएमआई या कमर का अनुपात बनाए रखें.
- धूम्रपान से दूर रहें और सेकेंड हैंड स्मोकिंग से बचें.
- शराब का सेवन कम करें.
- एट्रियल फाइब्रिलेशन की पहचान करें और उसका इलाज करें.
- अपने रक्त शर्करा को नियंत्रित करके मधुमेह से अपने जोखिम को कम करें.
प्रज्ञा बाजपेयी