हर 5वां व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार, नीरजा बिरला ने बताया बाहर आने का रास्ता

प्राइवेट सेक्टर में लगभग 42.5% प्रतिशत लोग डिप्रेसिव डिसॉर्डर का शिकार हैं. कर्मचारियों में बढ़ते डिप्रेशन की वजह से 2030 तक इंडस्ट्री को अरबों रुपये का नुकसान होना तय है.

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स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में डिप्रेशन की मार झेल रहे लोगों की कोई कमी नहीं है. स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में डिप्रेशन की मार झेल रहे लोगों की कोई कमी नहीं है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 5:13 PM IST

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर पांचवां व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है. यानी भारत में करीब 20 करोड़ लोग मानसिक अवसाद का शिकार हैं. स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में भी डिप्रेशन की मार झेल रहे लोगों की कोई कमी नहीं है. बिजनेस टुडे माइंड रश में 'एमपावर' की फाउंडर और चेयरपर्सन नीरजा बिरला ने लोगों में डिप्रेशन की वजह का बारीकी से विश्लेषण किया है.

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नीरजा बिरला ने बताया कि भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में डिप्रेशन और एनजाइटी चिंता का विषय बन गए हैं. प्राइवेट सेक्टर में लगभग 42.5% प्रतिशत लोग डिप्रेसिव डिसॉर्डर का शिकार हैं. कर्मचारियों में बढ़ते डिप्रेशन की वजह से 2030 तक इंडस्ट्री को अरबों रुपये का नुकसान होना तय है.

नीरजा ने बताया कि डिप्रेशन की मार झेल रहे लोगों की संख्या ज्यादा भी हो सकती है. क्योंकि मानसिक अवसाद झेल रहा व्यक्ति कभी अपने परिवार, दोस्तों या सहकर्मियों के साथ अपनी समस्या साझा नहीं करता है. इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ साल पहले उन्होंने MPower की स्थापना की है.

नीरजा के अनुसार, MPower डिप्रेशन की समस्या को दूर करने के लिए कई चरणों में काम करता है. ये डिप्रेशन के शिकार लोगों को सोशल कॉम्यूनिकेशन के लिए स्पेस देता है. ताकि लोग अपनी समस्या के बारे में खुलकर बात कर सकें. दूसरा, क्लिनिकल सर्विसेज के जरिए लोगों को डिप्रेशन से बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है.

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