तीन बार विधायक, 4 बार MLC, जानें कौन थीं कांग्रेस की कद्दावर नेता इंदिरा हृदयेश

इंदिरा हृदयेश उन महिलाओं में थीं, जिनकी हमेशा से रुचि राजनीति में ही रही. इंदिरा उस समय मात्र 33 साल की थीं, जब वो पहली बार विधान परिषद की सदस्य बनीं. इंदिरा पहली बार 1974 में यूपी विधान परिषद की सदस्य बनीं. उस समय उत्तराखंड अलग राज्य नहीं हुआ करता था.

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कांग्रेस की कद्दावर नेता थीं इंदिरा हृदयेश (फाइल फोटो-ट्विटर) कांग्रेस की कद्दावर नेता थीं इंदिरा हृदयेश (फाइल फोटो-ट्विटर)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2021,
  • अपडेटेड 3:41 PM IST
  • 33 साल की उम्र में बनीं MLC
  • 2002 में पहली बार MLA बनीं
  • कांग्रेस सरकार में मंत्री रहीं

उत्तराखंड की राजनीति को आज (रविवार) को एक बहुत बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. रविवार सुबह दिल्ली में कार्डिएक अरेस्ट से उनका निधन हो गया. 7 अप्रैल 1941 को जन्मीं इंदिरा हृदयेश ने 80 साल की उम्र में दिल्ली के उत्तराखंड भवन में आखिरी सांस ली. आइए जानते हैं कौन थीं इंदिरा हृदयेश?

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33 साल की उम्र में पहुंचीं विधान परिषद
इंदिरा हृदयेश उन महिलाओं में थीं, जिनकी हमेशा से रुचि राजनीति में ही रही. इंदिरा उस समय मात्र 33 साल की थीं, जब वो पहली बार विधान परिषद की सदस्य बनीं. इंदिरा पहली बार 1974 में यूपी विधान परिषद की सदस्य बनीं. उस समय उत्तराखंड अलग राज्य नहीं हुआ करता था. ये इंदिरा हृदयेश की काबिलियत ही थी कि कम उम्र में ही उनकी गिनती कांग्रेस के बड़े नेताओं में होने लगी. उसके बाद 1986, 1992 और 1998 में भी वो विधान परिषद की सदस्य चुनी गईं. विधान परिषद की सदस्य रहते कई समितियों की सदस्य भी रहीं. 

जब उन्हें 'सुपर मुख्यमंत्री' कहा जाता था
9 नवंबर 2000 को उत्तरप्रदेश को दो हिस्सों में बांटकर उत्तराखंड अलग कर दिया गया. उस समय जब अंतरिम सरकार बनी तो इंदिरा हृदयेश विपक्ष की नेता चुनी गईं. मार्च 2002 में उत्तराखंड में पहली विधानसभा के लिए चुनाव हुए. इस चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई और एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने. हलद्वानी सीट से इंदिरा पहली बार विधायक बनीं. एनडी तिवारी की सरकार में इंदिरा हृदयेश पीएडब्ल्यूडी, फाइनेंस, संसदीय कार्य जैसे अहम विभागों की मंत्री बनाई गईं. एनडी तिवारी की सरकार में इंदिरा का इतना दबदबा था कि उन्हें 'सुपर मुख्यमंत्री' कहा जाता था. ऐसा भी माना जाता है कि उस सरकार में इंदिरा जो बोल देती थीं, वो पत्थर की लकीर हुआ करता था.

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सीएम की कुर्सी आते-आते चली गई...
2007 के चुनावों में इंदिरा हृदयेश चुनाव हार गईं. लेकिन 2012 के चुनाव में फिर से हलद्वानी से जीतीं. कांग्रेस की सरकार बनी. शुरुआत में विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाया गया. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले ही कांग्रेस ने बहुगुणा को सीएम पद से हटाने का फैसला ले लिया. उस वक्त नए मुख्यमंत्री के लिए हरीश रावत, इंदिरा हृदयेश और प्रीतम सिंह जैसे नामों की चर्चा थी. उस समय इंदिरा हृदयेश का सीएम बनना तय माना जा रहा था. क्योंकि उन्होंने दावा किया था कि वो मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं. हालांकि, बाद में इंदिरा हरीश रावत से रेस हार गईं. हालांकि, सीएम पद की रेस हारने के बाद भी इंदिरा का कद सरकार में नंबर दो पर ही था.

2017 में तीसरी बार बनीं विधायक
2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की बुरी हालत हो गई. कांग्रेस 70 में से सिर्फ 11 सीट ही जीत सकी. इन 11 विधायकों में से एक इंदिरा हृदयेश भी थीं. चुनाव में हार के बाद इंदिरा हृदयेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुनी गईं. विपक्ष की नेता होने के बावजूद इंदिरा हृदयेश का कद उत्तराखंड की राजनीति में बहुत बड़ा था. इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें 'बुढ़िया' कहा तो मुख्यमंत्री को सार्वजनिक तौर पर उनसे माफी मांगनी पड़ी थी.

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क्या हुआ था?....
इसी साल जनवरी में नैनीताल में बीजेपी का एक कार्यक्रम था. इस कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने गैर मर्यादित बयान देते हुए इंदिरा हृदयेश को 'बुढ़िया' कह दिया था. उन्होंने कहा था, "हमारी नेता प्रतिपक्ष कह रहीं हैं कि बीजेपी के बहुत से विधायक मेरे संपर्क में हैं. अरे बुढ़िया, तुझसे क्यों संपर्क करेंगे? क्या डूबते जहाज से संपर्क करेंगे?"

इस पर इंदिरा हृदयेश ने साफ कहा कि "मैं मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करती हूं. इसलिए कोई टिप्पणी नहीं करूंगी." बंशीधर भगत के बयान पर जमकर विवाद हुआ तो उस समय के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी. 

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्विटर पर लिखा, "आदरणीय इंदिरा हृदयेश बहिन जी आज मैं अति दुखी हूं. महिला हमारे लिए अति सम्मानित और पूज्या हैं. मैं व्यक्तिगत रूप से आपसे और उन सभी से क्षमा चाहता हूं जो मेरी तरह दुखी हैं. मैं कल आपसे व्यक्तिगत बात करूंगा और पुनः क्षमा याचना करूंगा."

 

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