चमोली गांव में आई तबाही के बाद जहां एनटीपीसी परियोजना में जिंदा बचे हुए लोगों की तलाश का काम जारी है वहीं रैनी गांव में आए अवलॉन्च के बाद ऋषि गंगा परियोजना के मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम भी शुरू हो चुका है. तमाम एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन में मंगलवार को तीन कर्मचारियों के शव बरामद किए गए और आगे ऑपरेशन अभी भी जारी है.
इस परियोजना के जनरल मैनेजर और कश्मीर के रहने वाले बशारत जरगर अभी भी लापता हैं. पिता की तलाश में बेटा सालिक जरगर चमोली के रैनी गांव में पहुंच गया है और उम्मीद में है कि आज नहीं तो कल उसके पिता उससे मिल जाएंगे.
मूलतः श्रीनगर के रहने वाले बशारत जरगर अपने परिवार के साथ दिल्ली में भी रहते हैं और पिछले सप्ताह ही बतौर जनरल मैनेजर अपनी ड्यूटी करने ऋषि गंगा परियोजना मैं रैनी गांव पहुंचे थे. तबाही के बाद जब खबर फैली तो परिवार को चिंता हुई और बशारत के बेटे सालिक मंगलवार की सुबह चमोली पहुंच गए.
आज तक से अपनी व्यथा बताते हुए सालिक जरगर ने बताया कि घटना के दिन सुबह 10:15 पर ही उनकी बात अपने पिता से हुई थी और उसके बाद से उनकी कोई खबर नहीं है. सालिक कहते हैं कि जब उन्होंने अपने पिता की मोबाइल लोकेशन चेक की तो आखरी बार वह जगह रैनी गांव ही पता चली थी.
मन में कई सारे सवाल और आंखों में आंसू लिए सालिक कहते हैं कि घर में उनकी मां और बहन भी बशारत जरगर के लिए फिक्रमंद हैं और इंतजार में है कि वह सही सलामत लौटेंगे. ग्लेशियर टूटने के बाद तबाही की शुरुआत रैनी गांव में ही हुई थी जहां ऋषिगंगा परियोजना पूरी तरह न सिर्फ जमींदोज हो गई बल्कि सैलाब के साथ बह गई. घटना इतनी भयावह थी कि मलबा 70 से 80 फीट ऊपर उठ गया था.
घटनास्थल पर रेस्क्यू रिलीफ ऑपरेशन में शामिल एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा का कहना है कि जिस तीव्रता का सैलाब था और जैसा मलवास पास दिखाई दे रहा है उससे यह उम्मीद नहीं लगती कि कोई भी जिंदा बचा होगा. ऐसे कई लोगों की तलाश अभी जारी है जो इस परियोजना में काम कर रहे थे और फिलहाल लापता हैं.
आशुतोष मिश्रा