निवेशक आए...निवेश आएगा? पढ़ें: अखिलेश सरकार से कैसे अलग है योगी का इन्वेस्टर्स समिट

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव दोनों के ही राज में उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए इन्वेस्टर्स समिट कराए गए. लेकिन दोनों ही शासनकाल में समिट को लेकर बड़े दावे किए गए और अब देखना होगा कि योगी राज में प्रदेश को कितनी कामयाब मिलती है.

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योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव (फाइल फोटो) योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 10:09 PM IST

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के एक साल के अंदर सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट का भव्य आयोजन किया. ऐसा नहीं है कि देश के पिछड़े राज्यों में शुमार प्रदेश में पहली बार ऐसी किसी तरह की इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जा रहा है. योगी से पहले अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी सरकार ने भी उद्यमियों को अपने राज्य में निवेश करने के लिए इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन कराया था.

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योगी राज में लखनऊ में 2 दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट में करीब 5,000 उद्योगपतियों का जमावड़ा लग रहा है, और माना जा रहा है कि इस समिट में राज्य सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश मिल सकता है. समिट में भाग लेने वालों में मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, कुमार मंगलम बिड़ला, आनंद महिंद्रा, पकंज पटेल, शौभना कामिनेनी और नटराजन जैसे दिग्गज बिजनेसमैन शामिल हैं.

साथ ही इस सम्मेलन में जापान, नीदरलैंड, मॉरीशस समेत सात देश पार्टनर के रूप में हिस्सा ले रहे हैं. कहा जा रहा है कि समिट से पहले ही 900 MoU पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और इसके जरिए करीब 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई जा रही है.

अखिलेश राज में इन्वेस्टर्स समिट

योगी से पहले अखिलेश यादव के शासनकाल में भी इन्वेस्टर्स समिट कराए गए. 12 जून, 2014 को यूपी इन्वेस्टर्स कॉनक्लेव नई दिल्ली में कराया गया. जिसमें 23 कंपनियों की ओर से 54,606 करोड़ रुपये के 20 MoU पर हस्ताक्षर हुए थे. इस समिट में 6 देशों कनाडा, नीदरलैंड्स, तुर्की, पोलैंड, इटली, ताइपे के डिप्लोमैट भी शामिल हुए थे.

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इस समिट में भाषण देते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि हमने हाल ही में यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन लॉन्च किया है जिसमें 6 महीने के अंदर 40 लाख से ज्यादा युवा शामिल हुए.

2014 के बाद अखिलेश ने 2015 में यूपी इन्वेस्टर्स कॉनक्लेव का आयोजन मुंबई में कराया. 10 सितंबर, 2015 को आयोजित इस कॉनक्लेव में यूपी सरकार के साथ 33,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया. तब दावा किया गया था कि डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिलेगा.

इसी समिट में तोशिबा में 2 पावर प्लॉन्ट लगाए जाने पर सहमति बनी थी, साथ ही रिलायंस जियो, गोदरेजस आईटीसी और आइडियल सेलुलर ने भी प्रदेश में निवेश के लिए करार किया.

हालांकि कहा जाता है कि 33 हजार करोड़ के MoU पर हस्ताक्षर जरुर हुए थे, लेकिन प्रदेश में महज 3 हजार करोड़ का निवेश किया गया.

इसके अलावा यूपी सरकार ने मई, 2016 में दुबई में यूपी इन्वेस्ट फोरम समिट का आयोजन कराया. इस समिट में करीब 20 हजार करोड़ का निवेश किया गया. बिन जायद ग्रुप ने यूपी सरकार के साथ 18 हजार करोड़ का MoU हस्ताक्षर किया.

अखिलेश सरकार ने भी प्रदेश को तरक्की की राह पर ले जाने की ढेरों कोशिशें कीं, लेकिन जितना दावा किया गया था उसकी तुलना में इसका फायदा आमजन को मिलता नहीं दिखा. हजारों करोड़ के निवेश और लाखों नई नौकरियों की बात की गई थी, लेकिन स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया.

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अब योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी शासनकाल ने अपने शुरुआती एक साल के अंदर ही बड़े इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया है और इस समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. संभावना है कि समिट के अंतिम दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी भाग लेंगे. अब देखना होगा कि इस समिट से प्रदेश कितनी तरक्की कर पाएगा और कितने लोगों को रोजगार मिलेगा.

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