उत्तर प्रदेश के मेरठ में अब सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी. प्रशासन ने मेरठ की सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है. अभी तक शुक्रवार को सड़कों पर नमाज पढ़ी जाती थी. इसके चलते सड़कों पर जाम लग जाता था. मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने आदेश जारी कर कहा कि अब जिले की सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी.
इस मसले को लेकर शहर के तमाम मस्जिद और शहर काजी से भी एसएसपी ने बैठक की. एसएसपी ने बताया कि सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने के मुद्दे पर सभी लोग सहमत हो गए हैं. अब इसको लेकर कोई असमंजस नहीं है. हालांकि बकरीद के दिन नमाज पढ़ने पर छूट दी गई है यानी बकरीद के दिन ही सड़कों पर नमाज पढ़ी जा सकेगी.
इतना ही नहीं, मेरठ में बकरीद के मौके पर ऊंट की कुर्बानी देने पर भी पाबंदी लगा दी गई है. अभी तक बकरीद पर मेरठ में कुछ लोग ऊंट की कुर्बानी देते थे. हालांकि अब कोई भी मेरठ में ऊंट की कुर्बानी नहीं दे पाएगा. ऊंट की कुर्बानी को लेकर मेरठ के शहर काजी ने भी प्रशासन के साथ सुर मिलाते हुए कहा कि हम शहर में कानून-व्यवस्था नहीं बिगड़ना चाहते हैं. लिहाजा हमें प्रशासन की बात मंजूर है. अब बकरीद पर ऊंट की बलि नहीं दी जाएगी.
इससे पहले अलीगढ़ में नमाज बनाम हनुमान चलीसा का विवाद सामने आया था. हिन्दू महासभा ने चेतावनी दी थी कि अगर बकरीद पर सड़कों पर नमाज पढ़ी गई, तो हिन्दू संगठन के लोग भी सड़कों पर हनुमान चालीसा पढ़ेंगे. इसके बाद अलीगढ़ जिला प्रशासन ने सड़कों पर धार्मिक कार्यक्रमों पर बैन लगा दिया था. इस पर हिंदू जागरण मंच ने कहा था कि अगर आदेश लागू हुआ तो जिलाधिकारी से सड़क पर हनुमान चालीसा पढ़वाया जाएगा.
हिंदू जागरण मंच के राज्य महासचिव सुरेंद्र सिंह भगौर ने अलीगढ़ के जिलाधिकारी सीबी सिंह को धमकी भी दी थी. उन्होंने कहा था, 'हम जिलाधिकारी के आदेश को नहीं मानेंगे. वो आदेश देने वाले कोई नहीं हैं. अगर हमको सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक आयोजित करने से रोका गया, तो जिलाधिकारी से सड़क पर 'हनुमान चालीसा' पढ़वाया जाएगा.'
अरविंद ओझा