नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लेकर पूरे देश में विरोध- प्रदर्शन हो रहे हैं. पिछले शुक्रवार यानी 20 दिसंबर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में उग्र भीड़ और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें चार लोग मारे गए और 70 पुलिसकर्मी घायल हुए थे. इसी उपद्रव के दौरान हाईवे पर उग्र भीड़ से घिर चुके एक सिपाही को मौके पर पहुंचे हाजी ने बचाकर इंसानियत की अद्भुत मिसाल पेश की.
वह गुरुवार को घायल सिपाही का हाल जानने उसके घर पहुंचे तो सिपाही के परिवार ने मिठाई खिलाकर स्वागत किया. सिपाही अजय के परिजनों ने हाजी कदीर को अपने लिए भगवान बताया है. अजय के बच्चों ने हाजी के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया. डबडबाई आंखों से सिपाही अजय की मां ने कहा कि हाजी ने उनके बेटे की जान बचाई है. वह उनके लिए भगवान के समान हैं.
अजय की मां हरदेवी ने कहा कि वह जिंदगी भर उनका अहसान मानेंगी कि उनके कारण ही उनके बेटे की जान बची. वहीं सिपाही अजय कुमार ने अपने हाथ की चोट दिखाते हुए कहा कि वह आज जिंदा हैं तो हाजी कदीर की बदौलत ही. उन्होंने कहा भीड़ से घिरने के बाद उसे ऐसा नहीं लगा कि वह जिंदा बच पाएगा, लेकिन हाजी आए और अपने कपड़े दिए और चुपचाप वहां से निकाल दिया.
क्या कहते हैं हाजी
हाजी कदीर ने घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि वह दोपहर की नमाज पढ़ने गए थे, तभी हाईवे पर उन्होंने भगदड़ देखी और पता लगा कि एक सिपाही को घेर कर पीटा जा रहा है. उसका हाथ तोड़ दिया गया है, वह बाहर निकले और लोगों को भगा कर पुलिसकर्मी (अजय) को घायलावस्था में खून से लथपथ अपने मस्जिद के पास बने घर में ले गए. उन्होंने कहा कि अजय की मरहम पट्टी की और अपने कपड़े पठान सूट पहना कर अपना रिश्तेदार बता कर उसे चुपचाप वहां से रवाना कर दिया.
क्या है पूरा मामला
दरअसल 20 दिसंबर को जुमे की नमाज के बाद भीड़ ने जमकर उपद्रव किया था. पुलिस और उपद्रवियों के बीच फायरिंग की घटना भी हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 70 से अधिकारी पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भीड़ के निशाने पर थे. थाना उत्तर में तैनात पुलिसकर्मी अजय भी उपद्रवी भीड़ के पास ही नैनी गिलास के पास थे.
वह भीड़ में फंस गए और उपद्रवियों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी. कोई नवी गंज निवासी हाजी कदीर को इसकी खबर मिली और तब तक सिपाही गिरते- पड़ते मस्जिद के पास पहुंच गया. हाजी कदीर सिपाही को भीड़ से बचाकर अपने घर ले गए और पानी पिलाने के साथ ही मरहम पट्टी कर अपने कपड़ों में विदा किया. हाजी के इस नेक कार्य की हर तरफ सराहना हो रही है.
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