चुनाव अमेरिका में और खुशियां आजमगढ़ में. आप कहेंगे ये क्या बात हुई ? लेकिन ये सच है कि खुशियां अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर चलकर आजमगढ़ तक पहुंची हैं. अमेरिका में राष्ट्रपति के चुनावी कैंपेन में एक भारतीय फ्रैंक इस्लाम को डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन के साथ ना सिर्फ काम करने का मौका मिला है, बल्कि अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय को इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में वोट डालने के लिए तैयार करने का जिम्मा भी मिला है.
इतना ही नहीं फ्रैंक इस्लाम को मैरिलैंड जैसे महत्वपूर्ण स्टेट की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में जब ये सब हो रहा है तो आजमगढ़ में फ्रैंक इस्लाम के पैतृक गांव कौरा गहनी और उसके आसपास के इलाकों में इसकी चर्चा हो रही है.
नवंबर 2020 में अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन को मैरिलैंड में ट्रंप के उपर जबरदस्त बढ़त दिख रही है. फ्रैंक इस्लाम की पहचान न सिर्फ पूरे अमेरिका में बल्कि दुनियाभर के बड़े उद्योगपति-निवेशक एवं परोपकारी नागरिक के रुप में होती है. फ्रैंक इस्लाम क्यूएसएस ग्रुप इंक (QSS Group, Inc) के संस्थापक और सीईओ हैं.
इस्लाम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भी काफी करीबी माने जाते थे. बराक ओबामा ने इन्हें 2013 में जॉन एफ कैनेडी सेंटर ऑफ बी फॉर्म इन आर्ट्स के न्यासी बोर्ड के जनरल ट्रस्टी नियुक्त किया था और इस बार के राष्ट्रपति के चुनाव में फ्रैंक इस्लाम की जिम्मादारी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के चुनावी खर्चे के लिए फंड जुटाना है.
फ्रैंक इस्लाम, डेमोक्रेटिक पार्टी के चुनावी चंदे के लिए बनाये गये राष्ट्रीय फाइनेंस कमिटी के सदस्य चुने गये हैं. यहां यूपी के आजमगढ़ में रहने वाले उनके परिवार में इस बात को लेकर बेहद खुशी है कि उनके परिवार के एक सदस्य को दुनिया के सबसे मजबूत देश अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में अहम भूमिका निभाने का मौका मिला है.
मूलतः आजमगढ़ के रहने वाले फ्रैंक इस्लाम ने प्राथमिक शिक्षा यहीं से पूरी की. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से आगे की शिक्षा ग्रहण करने के बाद वो अमेरिका चले गए. अमेरिका पहुंचने के बाद फ्रैंक इस्लाम ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वहां अपनी मेहनत और काबीलियत के दम पर सफलता के नये आयाम गढ़ दिये.
अमेरिका में ही फ्रैंक इस्लाम ने एक अमेरिकी महिला Debbie Driesman से शादी की. आईटी एवं शिक्षा के क्षेत्र में काफी नाम होने पर इनकी पहुंच अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप तक बनी. अमेरिका में रहे रहे भारतीयों के वोट पाना राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए खासा दिलचस्प रहता है और भारतीय-अमेरिकी होने की वजह से फ्रैंक इस्लाम इस चुनाव में अमेरिका में रह रहे भारतीयों को डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए वोट करने वाले कैंपन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
चुनावी कैंपेन में फ्रैंक इस्लाम काफी व्यस्त हैं, लेकिन आजतक से बातचीत के लिए उन्होंने समय निकाला. अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए फैंक इस्लाम काफी भावुक हो जाते हैं. वो आज भी आजमगढ़ के अपने पैतृक गांव कौरा गहनी को बड़ी शिद्दत से याद करते हैं. बचपन में दोस्तों के साथ की गईं शरारतें, खेतों में पतंग के पीछे दौड़ना उन्हें आज भी याद है.
मदरसा 'इसरार' में पढ़े दिन उन्हें अच्छी तरह याद हैं, जिसमें उन्होंने कक्षा पांच तक शिक्षा पाई. आज भी उनकी इच्छा होती है कि वे अपने गांव आकर दोस्तों के साथ धान के खेत में पतंग लूटने के लिए दौड़ें. आजतक से टेलीफोन के जरिये बातचीत में उन्होंने अपनी यादों का साझा किया. बातचीत में उन्होंने बताया कि मदरसा इसरार से मिली सीख ने मेरी जिंदगी की बुनियाद को मजबूती दी. वो अपने मदरसा के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि मुझे वहां सहनशीलता और दूसरे धर्मों को बराबर का सम्मान देना सिखाया गया. वो बताते हैं कि मुझे वह दिन नहीं भूलता जब गांव में मेरे पिता ने मुझे मोटरसाइकिल चलाना सिखाया था.
(इनपुट: नीरज कुमार सिंह)
राजीव कुमार