उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश को उत्तम बनाने के लिए जोर लगा रहे हैं और कई जनकल्याणकारी योजना चला रहे हैं. लेकिन यहां स्कूलों की हालत देखकर ऐसा लगता है कि इसके लिए उन्हें और प्रयास करने होंगे, क्योंकि कई स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. इतना ही नहीं 45 हजार प्राथमिक स्कूलों में बिजली ही नहीं है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इटौंजा में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय है. इस विद्यालय में करीब 250 छात्र पढ़ते हैं. स्कूल में छात्रों के बैठने के लिए 5 कमरे हैं. लेकिन इन पांच में से एक भी कमरे में पंखा नहीं है. इस भीषण गर्मी में बच्चे बिना पंखे के पढ़ रहे हैं. यह जानते हुए भी गरीब मां-बाप अपने बच्चों को इस स्कूल में पढ़ाने को मजबूर हैं.
यह स्कूल 1913 में बन गया था लेकिन स्कूल में बिजली अभी तक नहीं पहुंच पाई है. ऐसे में मासूम बच्चों को एक तंग सीलन भरे कमरे में पढ़ाई के लिए बैठना पड़ता है. मजबूरन कुछ बच्चे तो अपने घरों से हाथ के बने पंखे लेकर आते हैं और कुछ किताब और कॉपी को ही पंखा बनाकर काम चलाते हैं.
स्कूल की प्रिंसिपल से आजतक को बताया, 'उन्होंने बिजली के लिए सरकारी दफ्तरों के खूब चक्कर काटे. इसके बाद स्कूल में वायरिंग तो हो गई लेकिन कनेक्शन फिर भी नहीं लगा.'
प्रदेश में कुल 1,13,500 प्राथमिक स्कूलों में से 45 हजार स्कूल ऐसे हैं जिनमें शुरुआत से ही बिजली नहीं है. लखनऊ जिले के कई स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं है. साल 2017 में योगी सरकार आई तो स्कूलों में सुधार के लिए तमाम वादे किए गए लेकिन हकीकत तो ये है कि दो साल बीत जाने के बाद भी अभी चंद स्कूलों में सिर्फ बिजली देने के लिए वॉयरिंग की गई है लेकिन कनेक्शन अभी भी नहीं जुड़े हैं.
इस मुद्दे पर जब आजतक ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल से बात की तो उन्होंने जल्द बिजली देने का वादा करके बात टालने की कोशिश की. उनसे जब यह सवाल पूछा गया कि जब तक इस गर्मी में बच्चों को बिजली नहीं मिल जाती तब तक क्या वह अपने दफ्तर में बगैर एसी के काम कर सकती हैं. इस पर अनुपमा ने जवाब दिया कि अगर हम दफ्तर में ऐसी बंद कर देंगे तो तमाम मिलने आने वाले लोगों को गर्मी मे बेहद परेशानी होगी.
aajtak.in / शिवेंद्र श्रीवास्तव