यूपी: अदालत की अनूठी पहल, जमानत के बदले 5-5 पौधे लगाने की शर्त

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की एक अदालत ने धारा 151 के तहत आने वाले शांतिभंग के मामले में जमानत देने के लिए अनोखी शर्त रखी है. अदालत ने आरोपियों को जमानत देने के लिए 5 पौधे लगाने की शर्त रखी है.

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यूपी में अदालत की अनोखी पहल यूपी में अदालत की अनोखी पहल

शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 28 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 7:56 PM IST

  • अदालत आरोपियों को पेड़ लगाने की दे रही सजा
  • 15 दिनों में 500 आरोपियों ने जमानत के बाद लगाए पेड़

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की तहसील नरैनी इन दिनों चर्चा में है. यहां की अदालत ने आरोपियों को जमानत देने के लिए ऐसी शर्त रख रही है, जो पर्यावरण के लिहाज से अच्छी पहल साबित हो रही है.

अदालत ने छोटे मामलों में आरोपियों को जमानत देने के लिए 5 पौधे लगाने की शर्त रखी है. साथ ही पेड़ लगाने का शपथपत्र और तस्वीर भी अदालत मांग रही है. इस अदालत की ओर से कई आरोपियों को शपथ पत्र देकर 5 पौधे लगाने का फरमान सुनाया गया है. अदालत ने पौधारोपण के बाद उसकी एक फोटो भी कोर्ट में पेश करने को कहा है.

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यूपी के बांदा जिले में एक-दो नहीं बल्कि करीब 500 आरोपियों को पिछले 15 दिनों में पांच पौधे लगाने की सजा के साथ जमानत दी जा चुकी है. बांदा जिले की नरैनी तहसील की उप-जिलाधिकारी वंदिता श्रीवास्तव की अदालत ने इस तरह का अनूठा प्रयोग किया है.

भारतीय दंड सहिंता की धारा 151 के तहत आने वाले शांतिभंग के मामलों में जमानत देने के बाद एसडीएम साहिबा इस तरह का भी आदेश दे रही हैं, जिससे आरोपियों को 5 पौधे लगाने पड़ रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक इसमें कानून की किसी प्रावधान के साथ छेड़खानी नहीं की गई है बल्कि पौधे लगाने की शर्त को इसमें जोड़ दिया गया है. अब इस अनूठे प्रयोग को देखकर इलाके के डीएम पूरे जिले में इसे लागू करने के निर्देश जारी कर रहे हैं. 151 धारा के तहत मामूली लड़ाई झगड़े और छोटे-मोटे मामले दर्ज होते हैं.

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तहसील न्यायालयों में इस तरह के मामलों की भरमार होती हैं. ऐसे में इन मामलों के जल्द से जल्द निपटारा करने के साथ-साथ एसडीएम ने इस प्रयोग को शुरू किया है ताकि पर्यावरण को भी फायदा हो सके.

फिलहाल इस प्रयोग की सभी तारीफ कर रहे हैं और आला अधिकारी इसे बड़े स्तर पर भी लागू करने की कवायद कर रहे हैं. अगर यह पूरी तरह से लागू होता है तो न सिर्फ समाज के लिए एक अच्छा संदेश होगा बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक अनूठी पहल होगी.

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