निर्भया के दादा से CMO ने की बदसलूकी, पूछा- दिल्ली क्यों भेजा?

बलिया के CMO ने निर्भया के परिजनों से कहा कि आज तक निर्भया के गांव में किसी ने डॉक्टर की पढ़ाई तो की नहीं और यहां के लोगों को डॉक्टर चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले डॉक्टर की पढ़ाई करें फिर इसी अस्पताल में डॉक्टर बन जाएं. इस गांव में डॉक्टर तो बनाया नहीं तो अस्पताल क्यों खुलवाया.

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बलिया के CMO पर बदसलूकी का आरोप बलिया के CMO पर बदसलूकी का आरोप

aajtak.in

  • बलिया,
  • 12 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

  • अस्पताल में डॉक्टर की मांग पर धरने पर बैठे परिजन
  • बलिया के CMO पर परिजनों से बदसलूकी का आरोप

दिल्ली की निर्भया के परिजनों से बदसलूकी का मामला सामने आया है. आरोप बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पर है. दरअसल, निर्भया के पैतृक गांव बलिया में निर्भया के नाम पर अस्पताल बना है. अस्तपाल में डॉक्टर की मांग के लिए निर्भया के परिजन धरने पर बैठे थे. मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि जिस गांव में किसी ने भी डॉक्टर की पढ़ाई नहीं की हो वहां के अस्पताल में हम डॉक्टर नहीं देंगे. मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रवैये से आहत निर्भया के दादा ने कहा निर्भया का कोई अपमान ना करे.

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क्या कहा CMO ने

परिजनों के मुताबिक, बलिया के CMO ने कहा कि आज तक निर्भया के गांव में किसी ने भी डॉक्टर की पढ़ाई तो की नहीं और यहां के लोगों को डॉक्टर चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले डॉक्टर की पढ़ाई करें फिर इसी अस्पताल में डॉक्टर बन जाएं. इस गांव में डॉक्टर तो बनाया नहीं तो अस्पताल क्यों खुलवाया. हम कहां से डॉक्टर लाएं, जितने पद हैं उतने डॉक्टर हैं नहीं.

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परिजनों के मुताबिक, सीएमओ ने कहा कि अस्पताल हमने नहीं बनवाया. जिसने बनवाया है उससे डॉक्टर की मांग की जाए. CMO ने निर्भया को भी नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि निर्भया कौन है. अगर वह डॉक्टर की पढ़ाई कर रही थी तो दिल्ली क्यों गई.

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बता दें कि निर्भया के पैतृक गांव मड़ावरा कला में निर्भय के नाम पर सरकार ने अस्पताल बनवाया था, ताकि निर्भया का सपना पूरा हो सके. निर्भया का सपना था कि वह डॉक्टर की पढ़ाई कर गांव में अस्पताल खोले, ताकि गांववालों को बाहर न जाना पड़े. पांच साल पहले अस्पताल तो आधा-अधूरा बन गया मगर वहां आज तक डॉक्टर और नर्स तक नहीं पहुंचे.

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इसी से नाराज होकर निर्भया के दादा की अगुवाई में गांववाले धरने पर बैठे थे और CMO उनको आश्वासन देने पहुंचे थे. मगर वह परिजनों और गांव वालों को बेइज्जत कर गए.

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