ट्विन टावर की जांच में खुल रहे राज, 1000 करोड़ के मालिक हैं नोएडा अथॉरिटी के कई कर्मचारी

विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक अफसरों को प्राधिकरण में तैनात बड़े अफसरों की बेनामी संपत्ति की जानकारी भी मिली है जिसे जांच के दायरे में लिया जा रहा है.

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ट्विन टावर केस की जांच के दौरान खुल रहे राज (फाइल फोटो) ट्विन टावर केस की जांच के दौरान खुल रहे राज (फाइल फोटो)

तनसीम हैदर

  • नोएडा,
  • 16 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 4:32 PM IST
  • ट्विन टावर केस की हो रही विजिलेंस जांच
  • विजिलेंस जांच के दायरे में हैं कई अधिकारी

सुपरटेक ट्विन टावर मामले में जैसे-जैसे विजिलेंस की जांच आगे बढ़ती जा रही है, नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे बड़े-बड़े अफसरों की सांसें अटकती जा रही हैं. प्राधिकरण में तैनात रहे तमाम अधिकारी और कर्मचारी अकूत संपत्ति के मालिक हैं. उन्होंने बिल्डरों को अनुचित लाभ देकर अवैध तरीके से धन और संपत्ति अर्जित किया है. विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक अफसरों को प्राधिकरण में तैनात बड़े अफसरों की बेनामी संपत्ति की जानकारी भी मिली है जिसे जांच के दायरे में लिया जा रहा है.

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जांच में इस बात का खुलासा भी हुआ है कि इन अफसरों ने बिल्डरों के प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट किए हैं. कई औद्योगिक, वाणिज्यिक और सूचना प्रौद्योगिकी के भूखंडों में भी भारी पैमाने पर निवेश किया गया है. तमाम अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं, जो 500 से एक हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. विजिलेंस की जांच में बेनामी संपत्ति के असली मालिकों के नाम उजागर होंगे.

विजिलेंस जांच के दायरे में नोएडा विकास प्राधिकरण के सीईओ रहे मोहिंदर सिंह, एसके द्विवेदी, आरपी अरोड़ा, पीएन बाथम, यशपाल सिंह, एके मिश्रा, राजपाल कौशिक हैं. इनके अलावा त्रिभुवन सिंह, शैलेंद्र, बाबूराम, टीएन पटेल, एसी सिंह, केके पाण्डेय, एमसी त्यागी, विपिन गौड़, राजेश कुमार, ज्ञान चंद, प्रवीण श्रीवास्तव, एन के कपूर और वीए देवपुजारी भी विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं.

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विजिलेंस सूत्रों की मानें तो एक अधिकारी देश छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में जा बसे हैं. तमाम अधिकारी और कर्मचारी ऐसे है, जो 500 से हजार करोड़ रुपये के मालिक हैं. इनकी संपत्ति केवल नोएडा में नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, मुंबई, उत्तराखंड, हिमाचल तक में है. बेनामी संपत्ति का जाल फैला हुआ है. कई अफसरों ने होटल, स्कूल और कॉलेज, रिसार्ट, पब-बार और अस्पताल तक में निवेश किया हुआ है. कुछ अधिकारियों ने विदेशों में भी धन खपाया है जो विजिलेंस जांच का हिस्सा है.

 

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