बीच बाजार हुई थी पिता की हत्या, लोगों को न्याय दिलाने बेटी बनी जज

जैसे ही यह खबर उनके घर पहुंची तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. अंजुम के बड़े भाई दिलशाद अहमद बताते हैं कि पिता की मौत के बाद हम सभी भाई-बहनों ने कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया. मैं 40 का हूं. मैंने परिवार के लिए शादी तक नहीं की. आज मुझे मेरी बहन की कामयाबी पर बेहद गर्व है.

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अंजुम सैफी अपने परिवार के साथ. अंजुम सैफी अपने परिवार के साथ.

आदित्य बिड़वई

  • मुजफ्फरनगर ,
  • 16 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 2:56 PM IST

पीसीएस जे एग्जाम का रिजल्ट घोषित होने के बाद मुजफ्फरनगर की अंजुम सैफी के घर उसके परिवार वाले और दोस्त बधाइयां देने पहुंचे. इस कामयाबी से अंजुम खुश तो है, लेकिन अपने पिता को याद करते हुए वह रो पड़ी.

दरअसल, बात 1992 की है. तब अंजुम महज चार साल की थी. हर रोज की तरह वह अपने पिता के घर आने का इंतजार ख़ुशी-ख़ुशी कर रही थी. इसी बीच घर के बाहर कुछ लोगों की आवाज आई कि तुम्हारे पिता की मौत हो गई है.

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बताया जाता है कि अंजुम सैफी के पिता रशीद अहमद की हार्डवेयर की दुकान थी. वह कुछ अपराधियों के खिलाफ जबरन उगाही पर मोर्चा खोले हुए थे. एक दिन कुछ अपराधी हॉकर से पैसे छीन रहे थे. तभी रशीद बीच बचाव करने पहुंचे तो उन्हें अपराधियों ने गोलियों से भून दिया.

जैसे ही यह खबर उनके घर पहुंची तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. अंजुम के बड़े भाई दिलशाद अहमद बताते हैं कि पिता की मौत के बाद हम सभी भाई-बहनों ने कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया. मैं 40 का हूं. मैंने परिवार के लिए शादी तक नहीं की. आज मुझे मेरी बहन की कामयाबी पर बेहद गर्व है.

वहीं, अपनी कामयाबी पर अंजुम भावुक हो गई. उन्होंने कहा कि, "काश आज पापा होते तो बेहद खुश होते. मैं अपनी कामयाबी का श्रेय अपने परिवार को देती हूं. मुझे हर मुश्किल में उनका साथ मिला है."

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बता दें कि पीसीएस जे एग्जाम पास कर चुकी अंजुम सैफी अब जज बनेंगी. उनकी मां हामिदा ने बेटी की कामयाबी पर ख़ुशी जाहिर की है.   

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