मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर 63.75% मतदान दर्ज, त्रिकोणीय मुकाबला

उत्तर प्रदेश की मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के कौशल किशोर, कांग्रेस के आरके चौधरी और बहुजन समाज पार्टी के सीएल वर्मा के बीच है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने गणेश रावत को मैदान में उतारा है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2019,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

19वें लोकसभा चुनाव के तहत मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर चुनाव के पांचवें चरण के तहत साेमवार को वोट डाले गए. इस सीट पर 63.75% मतदान दर्ज किया गया. वहीं इस पांचवे चरण में शामिल उत्तरप्रदेश की 14 सीटों पर औसत मतदान का आंकड़ा 53.20% रहा.

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर 12 उम्मीदवार मैदान में हैं. यहां पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के कौशल किशोर, कांग्रेस के आरके चौधरी और बहुजन समाज पार्टी के सीएल वर्मा के बीच है. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने गणेश रावत को मैदान में उतारा है.

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उन्नाव से सटी मोहनलालगंज लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. एक दौर में मोहनलालगंज कांग्रेस का मजबूत किला हुआ करता था, लेकिन वक्त के साथ समाजवादी पार्टी ने इसे अपना गढ़ बना लिया. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में सपा कमाल दिखाने में नाकाम रही और बीजेपी यहां से भी कमल खिलाने में कामयाब हो गई थी.

1962 से अस्तित्व में मोहनलालगंज सीट

मोहनलालगंज लोकसभा सीट 1962 में अस्तित्व में आई थी. 2019 से पहले तक 14 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं जिसमें से 5 बार कांग्रेस, 4 बार सपा और 3 बार बीजेपी जीत चुकी है. इसके अलावा एक बार लोक दल और एक बार जनता दल का सांसद भी चुना गया है.

मोहनलालगंज सीट पर पहला लोकसभा चुनाव 1962 में हुआ और कांग्रेस की गंगा देवी ने जीत हासिल की थी. इसके बाद वह लगातार तीन बार सांसद रही, लेकिन आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल के राम लाल कुरील ने कांग्रेस के विजयरथ को रोक दिया. हालांकि 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कैलाश पति ने राम लाल कुरील को मात देकर उनले यह सीट छीन ली और वो लगातार तीन बार सांसद चुने गए. 1984 में कांग्रेस नेता जगन्नाथ प्रसाद सासंद चुने गए.

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1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल ने सरजू प्रसाद सरोज को मैदान में उतारकर कांग्रेस के लगातार जीत के सिलसिले को रोक दिया. इसके बाद से कांग्रेस दोबारा इस सीट पर वापसी नहीं कर सकी. 1991 के चुनाव में छोटे लाल ने जीतकर बीजेपी का खाता खोला और 1996 में दोबारा जीते.

सपा को मिली लगातार 4 जीत

1998 से लेकर 2009 तक सपा ने इस सीट पर लगातार चार बार जीत हासिल की. सपा के विजय रथ को 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कौशल किशोर को उतारकर ब्रेक लगा दिया.

मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर 2011 के जनगणना के मुताबिक कुल जनसंख्या 26,95,769 है जिसमें 75.19 फीसदी ग्रामीण और 24.81 फीसदी शहरी आबादी है. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के मुताबिक इस लोकसभा सीट पर पांचों विधानसभा सीटों पर कुल 19,05,279 मतदाता हैं. इस सीट पर अनुसूचित जाति की आबादी 34.14 फीसदी है.

2014 का फैसला

इस सुरक्षित लोकसभा सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें सिधौली, मलीहाबाद, बख्शी का तालाब, सरजोनी नगर और मोहनलालगंज आती हैं. इनमें से 3 सीटों पर बीजेपी जबकि सपा का मोहनलालगंज में तो बसपा का सिधौली में कब्जा है.

2014 के लोकसभा चुनाव में मोहनलालगंज संसदीय सीट पर 60.75 फीसदी मतदान हुए थे. इस सीट पर बीजेपी के कौशल किशोर ने बसपा के आरके चौधरी को एक लाख 45 हजार 416  वोटों से मात देकर जीत हासिल की थी. तब कौशल किशोर को 4,55,274 वोट मिले तो बसपा के आरके चौधरी के खाते में 3,09,858 वोट आए. सपा की सुशीला सरोज को 2,42,366 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रही थीं. कांग्रेस के नरेंद्र गौतम को महज 52,598 वोट मिले थे.

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