गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में डाक्टरों कमी, मरीज बेहाल

लोग सिर्फ इंतजार ही करते नजर आ रहे थे, ऐसे में कई लोग तो थक जाने के कारण वहीं बैठ गए. लोगों का तो ये भी कहना था कि डॉक्टर जो दवाई लिखते हैं वो अस्पताल में नहीं मिलते है. लंबी लाइन सिर्फ इसलिए थी क्योंकि वहां पर डाक्टरों कि कमी थी. वैसे इस बात को खुद वहां के अधिकारी भी मानते है 'यहां पर डाक्टरों कि कमी है और हमने सरकार को पत्र भी लिखा है.'डॉ. जितेन्द्र त्यागी, सीएमएस, का कहना था कि हमने सरकार को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है.

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शुभम गुप्ता

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  • 08 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 6:08 PM IST

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार हर ओर काम कर रही है मगर क्या उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में कोई सुधार हुआ है. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद एंटी रोमीयो दल बनाया गया, पुलिस भी एक्टीव दिखाई दे रही है. इसके साथ ही बूचड़खानों पर भी बैन लगाया गया है. मगर योगी राज में क्या अस्पतालों में व्यवस्था ठीक है. गाजियाबाद में सरकारी अस्पताल की पड़ताल में साफ-सफाई तो ठीक दिखाई दी लेकिन मरीज परेशान दिखाइ दे रहे थे.

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लोग सिर्फ इंतजार ही करते नजर आ रहे थे, ऐसे में कई लोग तो थक जाने के कारण वहीं बैठ गए. लोगों का तो ये भी कहना था कि डॉक्टर जो दवाई लिखते हैं वो अस्पताल में नहीं मिलते है. लंबी लाइन सिर्फ इसलिए थी क्योंकि वहां पर डाक्टरों कि कमी थी. वैसे इस बात को खुद वहां के अधिकारी भी मानते है 'यहां पर डाक्टरों कि कमी है और हमने सरकार को पत्र भी लिखा है.' डॉ. जितेन्द्र त्यागी, सीएमएस, का कहना था कि हमने सरकार को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है.

हमारे देश में कई सालों से अस्पतालों में डाक्टरों की कमी हैं. इस बात को बीजेपी के पूर्व सांसद नरेंद्र कश्यप ने भी कई बार संसद में उठाया है. इस मामले में भी कश्यप का कहना है कि उन्होंने योगी आदित्य नाथ को इस बारे में पत्र भी लिखा है. नरेंद्र कश्यप का कहना है 'मैंने संसद में भी कई बार इस मुद्दे को उठाया है, हमारे देश में 2000 लोगों पर सवा डॉक्टर है. भाजपा सरकार लगातार इस बात पर ध्यान दे रही है कि कैसे डाक्टरों कि संख्या बड़ाई जाएं.

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यानी कि अभी योगी सरकार को अस्पतालों का हाल सुधारने के लिए सबसे पहले डाक्टरों की संख्या बढ़ाने पर सोचना होगा. क्योंकि बिना डॉक्टर के अस्पतालों की सूरत नहीं बदलीं जा सकती.

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