नेहरू की निशानी को प्रशासन का नोटिस, करोड़ों का बकाया चुकाने को कहा

आनन्द भवन 1920 से लगातार स्वतंत्रता आन्दोलन की गतिविधियों का केन्द्र रहा. महात्मा गांधी के साथ ही कांग्रेस के नरम दल से जुड़े सभी बड़े नेताओं का यहां आना जाना लगा रहता था. 1928 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा करने वाला भाषण आनन्द भवन में ही लिखा था. भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रारूप भी यहीं बना. विदेशी कपड़ों की होली भी यहीं जलायी गई.

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आनंद भवन. फोटो-prayagraj.nic आनंद भवन. फोटो-prayagraj.nic

aajtak.in

  • प्रयागराज,
  • 19 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

  • नगर निगम प्रयागराज ने जारी किया नोटिस
  • गृहकर का पुनर्मूल्यांकन कराकर कर माफ करने अपील
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू का पैतृक आवास है आनन्द भवन

प्रयागराज स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू के पैतृक आवास आनन्द भवन, स्वराज भवन और जवाहर तारामंडल को प्रयागराज नगर निगम ने बकाया हाउस टैक्स चुकाने को कहा है. ये बकाया लगभग 4 करोड़ 19 लाख रुपये का है.

ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा आनन्द भवन और स्वराज भवन नेहरू परिवार का घर रहा है. स्वराज भवन अब नेहरू परिवार की स्मृतियों के एक संग्रहालय तौर पर संचालित होता है, जबकि आनंद भवन को एक म्यूजियम में बदल दिया गया है, यहां पर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं धरोहर रखी गईं हैं. इन तीनों इमारतों का रखरखाव जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड द्वारा किया जाता है.

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नगर निगम के अधिकारियों ने कहा है कि नोटिस इस आधार पर दिया गया है कि आनंद भवन और आस-पास की इमारतों का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है इसलिए हाउस टैक्स का भुगतान किया जाना चाहिए.

2003 से बकाया है हाउस टैक्स

प्रयागराज नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, पी.के. मिश्रा ने कहा, "2003 से गृह कर बकाया है हर साल बिल भेजा जाता है, इसके एवज में कुछ पार्ट पेमेंट किया जाता है और 2003 से फुल पेमेंट नहीं हुआ है, वही बकाया है और प्रतिवर्ष बिल भेजा जाता है. इसी प्रक्रिया में नोटिस जारी किया गया है."

चैरिटेबल ट्रस्ट होने का प्रमाण नहीं

प्रयागराज की महापौर अभिलाषा गुप्ता 'नंदी' ने कहा कि आनंद प्रबंधन ने अभी तक चैरिटेबल ट्रस्ट होने का प्रमाण जमा नहीं किया गया है और जब तक वह प्रमाण जमा किया नहीं जाता है, तब तक कर निर्धारण की प्रक्रिया नहीं रुक सकती है. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड से एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें आनंद भवन और आसपास के परिसरों पर लगाए गए व्यावसायिक कर की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है. महापौर ने कहा कि इस दिशा में आगे कदम उठाने से पहले संबंधित फाइलों और दस्तावेजों का अध्ययन किया जाएगा.

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दिमाग खोले नगर निगम

वहीं कांग्रेस नेता अभय अवस्थी ने कहा कि नगर निगम नई संस्कृति विकसित कर रहा है. उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आनंद भवन जो आजादी की लड़ाई का केंद्र बिंदु रहा है और जो राष्ट्र को समर्पित वह ट्रस्ट है, इसे नेहरू परिवार ने देश को दे दिया और मौजूदा सरकार उससे टैक्स वसूलना चाहती है. नगर निगम को चाहिए कि वो अपना दिमाग खोले.

चुकाया गया था बिल

वहीं दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड के सचिव एन. बालकृष्णन ने कहा कि 2003-04 में ट्रस्ट द्वारा 3,000 रुपये का बिल मिला था, जिसका विधिवत भुगतान किया गया था. हालांकि, 2005 में, 2004-05 के लिए 24.67 लाख रुपये से अधिक का बिल भेजा गया था. उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 तक 12.34 लाख रुपये का वार्षिक बिल भेजा जाता रहा है, लेकिन 2014-15 से इसे घटाकर 8.27 लाख रुपये कर दिया गया. एन. बालाकृष्णन ने आगे कहा कि जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड एक धर्मार्थ ट्रस्ट है और किसी भी व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल नहीं है.

स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बिन्दू

आनन्द भवन 1920 से लगातार स्वतंत्रता आन्दोलन की गतिविधियों का केन्द्र रहा. महात्मा गांधी के साथ ही कांग्रेस के नरम दल से जुड़े सभी बड़े नेताओं का यहां आना जाना लगा रहता था. 1928 में पंडित जवाहर लाल नेहरु ने पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा करने वाला भाषण आनन्द भवन में ही लिखा था. भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रारुप भी यहीं बना. विदेशी कपड़ों की होली भी यहीं जलायी गई.

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1930 में इसे कांग्रेस का मुख्यालय बनाया गया, 1940 में यहां कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में महात्मा गांधी के साथ दूसरे बड़े नेता भी शामिल हुए थे. हालांकि आजादी मिलने के बाद कांग्रेस मुख्यालय को 1948 में दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया. आनन्द भवन को इसके बाद जवाहर लाल नेहरु मेमोरियल फंड के हवाले कर दिया गया. स्वराज भवन में पंडित नेहरु की इच्छा से बाल भवन बनाया गया था, जहां आज भी अनाथ बच्चों को रखा जाता है. वहीं आनन्द भवन को 16 नवम्बर 1969 को पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने राष्ट्र को समर्पित कर दिया और 1971 में इसे संग्रहालय बना दिया गया.

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