अमित शाह बोले- तोंद वाले पुलिसकर्मी का उड़ता है मजाक, लोग बदलें नजरिया

अमित शाह ने कहा कि जनता का नजरिया पुलिस के लिए और पुलिस का नजरिया जनता के लिए बदलना जरूरी है. फिल्मों में तोंद वाले पुलिसकर्मी को दिखाकर उसका मजाक उड़ाया जा सकता है, लेकिन यह भी समझने की जरूरत है कि पुलिसकर्मियों पर सुरक्षा की कितनी जिम्मेदारी होती है.

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अखिल भारतीय पुलिस साइंस कांग्रेस में अमित शाह (फोटो-PTI) अखिल भारतीय पुलिस साइंस कांग्रेस में अमित शाह (फोटो-PTI)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 29 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

  • ब्रिटिश राज में बने कानून अब अप्रासंगिक
  • पुलिस चाह ले तो कोई चीज असंभव नहीं
  • जनता व पुलिस का नजरिया बदलना होगा

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ब्रिटिश राज में बने आईपीसी और सीआरपीसी जैसे कानूनों को बदले जाने की वकालत की है. उन्होंने कहा कि अब ये कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं. आज की जरूरतों के मुताबिक इन कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन किया जाएगा. अमित शाह शुक्रवार को 47वीं अखिल भारतीय पुलिस साइंस कांग्रेस-2019 के समापन के अवसर पर बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि पुलिस चाह ले तो कोई चीज असंभव नहीं है.

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गृहमंत्री ने कहा, "समय के अनुसार, आईपीसी और सीआरपीसी में बदलाव की जरूरत है. ये कानून तब बनाए गए थे, जब हम पर अंग्रेज शासन करते थे. उनकी प्राथमिकता में भारत के नागरिक नहीं थे, अब जब हम आजाद हैं तो इसमें जनता की सहूलियत के मुताबिक बदलाव की जरूरत है." इसके लिए उन्होंने राज्यों से भी सुझाव मांगा है.

क्यों तोंद वाले पुलिसकर्मियों का उड़ता है मजाक

अमित शाह ने कहा कि जनता का नजरिया पुलिस के लिए और पुलिस का नजरिया जनता के लिए बदलना जरूरी है. फिल्मों में तोंद वाले पुलिसकर्मी को दिखाकर उसका मजाक उड़ाया जा सकता है, लेकिन यह भी समझने की जरूरत है कि पुलिसकर्मियों पर सुरक्षा की कितनी जिम्मेदारी होती है.

गृहमंत्री ने कहा, "लोग दिवाली मना रहे होते हैं, पुलिसकर्मी सुरक्षा में लगे होते हैं. लोग छुट्टी लेकर घर जाते हैं, होली खेलते हैं लेकिन पुलिसकर्मी इस चिंता में रहते हैं कि कहीं कोई दंगा न हो जाए. पुलिस विभाग के 35 हजार जवानों ने अपनी शहादत दी, जिसके बाद इस देश के लोग आज खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं."

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अमित शाह ने कहा, "हम मोडस अपरेंडी ब्यूरो बनाने पर विचार कर रहे हैं. नारकोटिक्स ब्यूरो के ढांचे में हम बदलाव चाहते हैं. उन्होंने कहा कि डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए."

उन्होंने कहा कि जब तक प्रॉसिक्यूशन इसकी चिंता नहीं करेगा, अपराधियों को सजा नहीं मिलेगी. हर राज्य में डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन को मजबूत करना चाहिए. जेल मैनुअल का अपग्रेडेशन होना चाहिए. जेलें भी कानून व्यवस्था का हिस्सा हैं."

रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय बनेगा

केंद्रीय गृहमंत्री ने एक रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना की भी घोषणा की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इसके लिए विधेयक लाएगी. जिन राज्यों में पुलिस विश्वविद्यालय नहीं हैं, वहां इस विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज स्थापित किया जाएगा. इससे देश में रेडीमेड पुलिस अफसरों की जरूरत पूरी हो सकेगी.

उन्होंने कहा, "यह पुलिस साइंस कांग्रेस का 47वां आयोजन है. 1960 से ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं. मुझे लगता है कि अब तक इन आयोजनों में जितने प्रस्ताव रखे गए हैं, उनमें से कितने लागू हुए इस पर भी एक आयोजन होना चाहिए."

कम्युनिटी पुलिसिंग बढ़ाने की जरूरत

इसके पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि समय के अनुसार, आज कम्युनिटी पुलिसिंग बढ़ाने की जरूरत है. इसके लिए जवानों को ठीक तरह से प्रशिक्षित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अब साइबर अपराध पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है. अपराध का दायरा इंटरनेशनल हो गया है, इसके लिए पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम किया जा रहा है.

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(IANS के इनपुट के साथ)

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