बनारस: भीषण गर्मी के बीच मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लगी लंबी लाइनें

Varanasi Manikarnika Ghat: भीषण गर्मी के बीच काशी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए शवों का आना अचनाक बढ़ गया है, जिसकी वजह से अंतिम संस्कार के लिए लोगों को 4-4 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है. शव लाने वालों का कहना है कि बैठने के लिए ना तो छांव की व्यवस्था है और ना ही पीने के पानी की.

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मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लगी लंबी लाइनें (फोटो-आजतक) मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लगी लंबी लाइनें (फोटो-आजतक)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी ,
  • 14 जून 2022,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST
  • श्मशान घाट पर पड़ी भीषण गर्मी की मार
  • अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा है घंटों इंतजार
  • गर्मी में 40-50 शव प्रतिदिन आ रहे हैं

देश के कई राज्य भीषण गर्मी का प्रकोप झेल रहे हैं. इस बीच उत्तर प्रदेश के वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर शवों के आने का सिलसिला बढ़ गया है. खराब व्यवस्था के बीच शवयात्री शवों के अंतिस संस्कार के लिए चिलचिलाती धूप में घाट की सीढ़ियों पर घंटों अपने नंबर आने के लिए मजबूर हैं. शवदाह करने वालों का कहना है कि जगह भर जाने के चलते शवयात्रियों को इंतजार करना पड़ रहा है. इसके अलावा घाट पर ना तो छांव की व्यवस्था है और ना ही पीने के पानी की. 

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ऐसा कहा जाता है कि काशी में मिली मौत सीधे मोक्ष के द्वार खोल देती है. जिसकी वजह से यहां पर बड़ी संख्या में शव अंतिम संस्कार के लिए लाए जाते हैं. यहां शवदाह का काम चौबीस घंटे चलता रहता है.

भयंकर गर्मी के बीच यहां शवों को लाए जाने का सिलसिला इतना बढ़ गया है कि गंगा घाट की सीढ़ियों पर शवों के साथ लोगों को अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करता देखा जा सकता है. यहां पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए 4-4 घंटों का इंतजार करना पड़ रहा. 

मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लगी लंबी लाइनें

 

आजमगढ़ से आए एक शवयात्री सौमित्र उपाध्याय ने बताया, वह अपनी बड़ी मां का शव लेकर मणिकर्णिका घाट आए हैं. उन्हें तीन घंटे हो गए हैं लेकिन अब तक उनका नंबर नहीं आया है. यहां पर भयंकर गर्मी पड़ रही है, बैठने के लिए ना तो छांव की व्यवस्था है और ना ही पीने के पानी की. जिसकी वजह से शवयात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 

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वहीं, शवदाह करने वाले डोम परिवार के सदस्य राजेश चौधरी का कहना है कि आम दिनों के मुकाबले 10-20 शव ज्यादा लाए जा रहे हैं. वैसे 30-35 शव लाए जाते थे, लेकिन गर्मी में 40-50 शव लाए जा रहे हैं. भीषण गर्मी की वजह से गंगा की दूरी बढ़ गई है. जिसकी वजह से चिता को बुझाने में समय लग रहा है.

नगर निगम की तरफ से ना तो बैठने की ही सुविधा है और ना ही पीने का पानी उपलब्ध है. एक बॉडी को जलने में ढाई से तीन घंटे का समय लग जाता है. 12 चूल्हे नीचे हैं और 10 ऊपर. मौसम ठीक होने पर स्थिति सामान्य होगी. 

 

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