अखाड़ा परिषद चुनावः 7 अखाड़ों की मौजूदगी, एक की लिखित सहमति से अध्यक्ष बने रविंद्र पुरी, 4 अखाड़े नहीं आए

महंत नरेंद्र गिरि की मौत लगभग एक महीने बाद अखाड़ा परिषद को उसका नया अध्यक्ष मिल गया. सोमवार को प्रयागराज में हुई बैठक में रविंद्र पुरी को अखाड़ा परिषद को नया अध्यक्ष चुना गया.

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अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष रविंद्र पुरी. अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष रविंद्र पुरी.

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज,
  • 25 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST
  • रविंद्र पुरी बने अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष
  • महंत नरेंद्र गिरि की मौत से खाली था पद

Akhara Parishad President: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव सोमवार को हो गया. संतों ने सहमति से रविंद्र पुरी को अखाड़ा परिषद का नया अध्यक्ष चुन लिया है. रविंद्र पुरी को 7 अखाड़ों की मौजूदगी और एक अखाड़े की लिखित सहमति के बाद अध्यक्ष चुना गया है. हालांकि, रविंद्र पुरी ने 19 अक्टूबर को ही खुद को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष घोषित कर दिया था.

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लेकिन, इस चुनाव में अखाड़ों में पड़ी फूट भी सामने आ गई. इस चुनाव में 13 अखाड़ों में से सिर्फ 7 अखाड़े ही पहुंचे, जबकि एक ने लिखित सहमति दी. प्रयागराज के निरंजनी अखाड़े में हुई इस बैठक में जूना, निरंजनी, नया उदासी, अग्नि, आनंद, आवाहन अखाड़े के प्रतिनिधि शामिल हुए. उनके अलावा निर्मल अखाड़े का बागी गुट भी इसमें शामिल हुआ. वहीं, निर्मोही अखाड़े ने रविंद्र पुरी के नाम पर लिखित सहमति दी. जबकि, इस चुनाव प्रक्रिया से निर्वाणी, दिगंबर, महानिर्वाणी, अटल और बड़ा उदासीन अखाड़े नदारद रहे. 

प्रयागराज में हुई थी संतों की बैठक.

कैसे चुना जाता है अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष?

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को चुनने की प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक है. सभी अखाड़े एक साथ जुटते हैं और अध्यक्ष पद का चुनाव करते हैं. सभी 13 अखाड़ों से दो-दो प्रतिनिधि चुनाव में शामिल होते हैं और अध्यक्ष चुनते हैं. अगर अध्यक्ष पद के लिए कई नाम आते हैं तो भी चुना उसे ही जाता है जिसके नाम पर रजामंदी बनती है. 

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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का काम क्या होता है?

अखाड़ा परिषद बनाया इसलिए गया था ताकि अव्यवस्थाओं को दूर किया जा सके. अखाड़ा परिषद किसी अखाड़े के कामकाज में दखल नहीं देता लेकिन उन पर पैनी नजर रखता है. अखाड़े परिषद के ये तीन काम प्रमुख माने जाते हैं...

1. कुंभ मेलों को लेकर सभी तरह की व्यवस्थाओं में अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष ही फैसला लेता है. उनके सहयोग से ही मेले में अलग-अलग अखाड़ों को जगह और स्नान की व्यवस्था की जाती है.

2. फर्जी बाबाओं पर कार्रवाई करने का काम भी होता है. 2017 में 14 ऐसे फर्जी बाबाओं की लिस्ट जारी की थी. इसमें गुरमीत राम रहीम, आसाराम बापू और संत रामपाल का नाम भी शामिल था.

3. किसी नए अखाड़े को मान्यता देना या किसी की मान्यता रद्द करने का काम भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का ही होता है. 

क्यों हुआ ये चुनाव?

20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि की मौत हो गई थी. पुलिस के मुताबिक उन्होंने आत्महत्या की थी. मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था, जिसमें उन्होंने परेशान होने की बात कही थी. उनकी मौत के बाद से ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का पद खाली था.

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