रोहिंग्या प्रवासियों के फर्जी दस्तावेज बनाने में की मदद, पुलिस के रडार पर आया ये शख्स

मामले की जांच पड़ताल करने वाले अफसरों का कहना है कि मोहम्मद सत्तार खान ने फर्जी भारतीय दस्तावेजों के लिए रोहिंग्या प्रवासियों को अपना पता और दस्तावेज दिए थे. बाद में मामले में, सत्तार और रोहिंग्या आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान तैनात पुलिस बल (फोटो-PTI) नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान तैनात पुलिस बल (फोटो-PTI)

आशीष पांडेय

  • हैदराबाद,
  • 21 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 1:10 PM IST

  • 127 लोगों को नागरिकता साबित करने का नोटिस
  • मामला 2018 का है, आधार प्राधिकरण कर रहा जांच

तेलंगाना के 127 लोगों को भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए नोटिस भेजने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इसकी वजह से इस मामले को लेकर आधार प्राधिकरण ने गुरुवार को अपनी सुनवाई रद्द कर दी.

असल में, आधार प्राधिकरण ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई के लिए एक हॉल किराये पर लिया था जहां कई लोग पहुंचे थे. लेकिन बाद में आधार प्राधिकरण ने सुनवाई का कार्यक्रम रद्द कर दिया.

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बहरहाल, नोटिस को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है. असल में, सत्तार खान नाम के शख्स को आधार अथॉरिटी की ओर से नोटिस मिलने से विवाद बढ़ा है. उन्हें पुलिस जांच का सामना करना पड़ा रहा है और लोग उन्हें संदेह की नजर से देखने लगे हैं.

इंडिया टुडे के पास FIR की कॉपी भी है. इसके मुताबिक म्यांमार के नागरिकों को फर्जी पासपोर्ट और आधार कार्ड दिलाने में मदद करने के आरोप में सत्तार खान के खिलाफ 6 फरवरी 2018 को मामला दर्ज किया गया था.

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एफआईआर के मुताबिक, 'म्यांमार के नागरिक नजरूल इस्लाम ने हैदराबाद के पते से काल्पनिक नाम से वोटर कार्ड बनवा लिया था. बाद उसने म्यांमार की रहने वाली अपनी पत्नी प्रवीन के लिए काल्पनिक नाम पर आधार कार्ड भी बनवा लिया. मकान मालिक सत्तार की मदद से उसने पासपोर्ट भी बनवा लिया.'

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सत्तार खान पर क्या आरोप?

मामले की जांच करने वाले अफसरों का आरोप है कि मोहम्मद सत्तार खान ने फर्जी भारतीय दस्तावेजों के लिए रोहिंग्या प्रवासियों को अपना पता और दस्तावेज दिए थे. बाद में मामले में, सत्तार और रोहिंग्या आरोपियों को हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. साथ ही पुलिस ने आधार प्राधिकरण को पत्र लिखकर कार्ड रद्द करने का अनुरोध किया.

आला पुलिस सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है जब फर्जीवाड़ा संबंधी केस सामने आते हैं तो आधार प्राधिकरण को पत्र लिखकर संदिग्ध कार्ड को रद्द करने का अनुरोध किया जाता है.

इस बीच, हैदरबाद के वकील खाजा एजाजुद्दीन ने आधार प्राधिकरण को "जनहित" के तहत कानूनी नोटिस भेजा है, जो आधार अधिनियम, 2016, आधार और केंद्र सरकार के अधिकारों के तहत जारी किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि आधार प्राधिकरण के अधिकारियों और केंद्र सरकार को नागरिकता के बारे में पूछने का अधिकार नहीं है. नागरिकता के बारे में पूछना गैर संवैधानिक है.

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