2019 की वो 10 बड़ी घटनाएं जिसने हिला दी दुनिया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन से मुलाकात की. इसके बाद किम जोंग उन के साथ डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया की सरजमीं पर कदम रखा. इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए जिन्होंने उत्तर कोरिया की धरती पर कदम रखा.

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डोनाल्ड ट्रंप के साथ उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग उन (फाइल फोटो-ANI) डोनाल्ड ट्रंप के साथ उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग उन (फाइल फोटो-ANI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 7:43 PM IST

  • ऐतिहासिक रही ट्रंप और किम जोंग की मुलाकात
  • आईएस सरगना बगदादी को दौड़ा कर किया ढेर
  • अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का दुनिया के देशों पर असर
  • सीरिया में तुर्की का हमला, ट्रंप बोले-बर्बाद कर दूंगा

2019 में वैश्विक उठापटक की कई घटनाएं ऐसी हैं जिनसे दुनिया की दशा-दिशा बदल गई. इन घटनाओं से दुनिया को देखने का नजरिया बदल गया. इनमें ब्रेग्जिट, हांगकांग प्रदर्शन, अमेरिका-चीन टैरिफ वॉर, ट्रंप-किम जोंग की वार्ता, पीओके में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक, सऊदी अरब की राजनीति, सीरिया पर तुर्की का हमला, इजराइल में नेतन्याहू की हार, श्रीलंका में आतंकी हमला और अमेरिका और तालिबान के बीच शांति वार्ता शामिल हैं.

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1-ब्रेग्जिट

ब्रेग्जिट यानी ब्रिटेन का यूरोपियन यूनियन (ईयू) से अलग होना. ब्रिटेन का अलगाव सुनने में भले साधारण लगता हो लेकिन इसके दूरगामी असर हैं. इससे पूरे यूरोप की आर्थिक और विदेश नीति में बड़ा बदलाव होगा. इसके लिए ब्रिटेन में जनमत संग्रह तक कराया गया जिसमें लोगों ने एकसुर में यूरोप से अलग होने का प्रण किया. हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में 2 साल का वक्त लगेगा लेकिन ब्रिटेन में इससे जुड़ी हर दिन कोई न कोई घटना सामने आ रही है.

जनमत संग्रह में हार के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून को इस्तीफा देना पड़ा. बाद में इसी का शिकार थेरेसा मे हुईं. अब बोरिस जॉनसन भी इसी कतार में हैं जिन्होंने ब्रेग्जिट को देखते हुए देश में आम चुनाव का ऐलान किया है. आम चुनाव के बाद ब्रिटेन का भविष्य तय होगा कि ब्रेग्जिट से इसके दिन बहुरेंगे या भविष्य स्याह होगा.

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ब्रेग्जिट की सांकेतिक तस्वीर

2-हांगकांग में प्रदर्शन

हांगकांग के इतिहास में शायद पहली बार हुआ जब वहां के शांतिप्रिय लोग चीन की नीति के खिलाफ सड़कों पर उतरे और लोकतंत्र की मांग की. यह प्रदर्शन अब भी जारी है. हांगकांग दुनिया के कारोबारी हब में एक है जिसे अल्फा प्लस शहरों में शुमार किया जाता है. यहां प्रदर्शन का कारण चीन का प्रत्यर्पण बिल है जिसके बारे में हांगकांग के लोगों का मानना है कि इससे उनकी आजादी पर असर पड़ेगा और वे चीन के हाथों गुलाम बन जाएंगे.

यहां के लोगों को डर है कि अगर यह बिल पास हो जाता है तो चीन में जिस प्रकार की पाबंदियां और अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश है, कुछ वैसा ही उन्हें भी झेलना पड़ेगा. हांगकांग के लोग चीन के कानूनी पचड़े में खुद को नहीं फंसने देना चाहते. लिहाजा इस प्रदर्शन में छात्र से लेकर कारोबारी और कानूनविद से लेकर मानव अधिकार कार्यकर्ता तक शामिल हैं.

3-अमेरिका-चीन टैरिफ वॉर

डोनाल्ड ट्रंप का एक डायलॉग काफी लोकप्रिय है जिसमें उन्होंने साल 2017 में अपने सलाहकारों से कहा था-आई वॉन्ट टैरिफ्स...अमेरिकी प्रशासन ने उनकी बात मानी और उनके नक्शेकदम पर चल पड़ा. साल 2018 में शुरू हुआ टैरिफ वॉर 2019 में अपने विकराल रूप में आया. चीनी सामानों पर 50 अरब डॉलर के टैरिफ से शुरू हुआ यह कारोबारी युद्ध 250 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि ट्रंप ने जिस मंशा से टैरिफ लगाया, उसका असर ठीक उलटा हुआ. टैरिफ वॉर से चीन से ज्यादा घाटा अमेरिका को हुआ. चीन की भी आर्थिक दशा गड़बड़ा गई. उधर पूरी दुनिया में सस्ते सामान की झड़ी लगाने वाला चीन भी बैकफुट पर आ गया. इसका दूरगामी असर उन देशों पर पड़ा जहां चीनी सामान आयात होते हैं.

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कहा जाता है कि दुनिया में अभी मंदी की जो झलक दिख रही है, उसके पीछे यही टैरिफ वॉर है. अमेरिका से शुरू हुआ इसका प्रभाव पूरी दुनिया में पसर चुका है. दुनिया के स्टॉक मार्केट धराशायी हुए, अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ गया, अमेरिकी कारोबारियों ने निर्यात शुल्क बढ़ा दिए जिससे अमेरिकी किसानों को विदेशी बाजार मिलने में दिक्कतें आने लगीं. अमेरिका-चीन के इस जंग में दुनिया के छोटे बड़े देश पिसते गए और इसका दंश अब भी जारी है.

4-ट्रंप-किम जोंग के बीच वार्ता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन से मुलाकात की. इसके बाद किम जोंग उन के साथ डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया की सरजमीं पर कदम रखा. इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए जिन्होंने उत्तर कोरिया की धरती पर कदम रखा.

बता दें, कुछ समय पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया को एटमी बम से उड़ाने की धमकी देते थे और उत्तर कोरिया अमेरिका को आंख दिखाता था. डोनाल्ड ट्रंप खुद किम जोंग उन पर कई बार हमला बोल चुके हैं और धमकी दे चुके हैं. उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने भी ट्रंप की धमकी और हमले का मजबूती से जवाब दिया था. उन्होंने भी ट्रंप को अनाप-शनाप कहा था. हालांकि अब हालात बदल चुके हैं और दोनों देश हाथ मिला चुके हैं.

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5-बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक की थी. भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया था.

इस हवाई हमले में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया. इस दौरान भारतीय वायुसेना का विमान मिग-21 हादसे का शिकार हो गया और इसको उड़ा रहे पायलट विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में पहुंच गए. वहां उन पर पाकिस्तानियों ने हमला कर दिया और फिर पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ लिया. हालांकि भारत के दबाव के आगे पाकिस्तान को झुकना पड़ा था और भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा करना पड़ा था.

इस पूरी घटना ने भारत-पाकिस्तान के विदेश संबंधों को झकझोर कर रख दिया और शांति वार्ता की बात 'प्वाइंट ऑफ नो रिटर्न' (अब कुछ नहीं हो सकता) पर पहुंच गई.

6-आतंक का आका बगदादी ढेर

अमेरिकी सेना ने आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आका अबु बकर-अल बगदादी को मार गिराया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टी की. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बगदादी सुरंग में छुपा हुआ जो अमेरिकी सेना के हमले में मारा गया. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि बगदादी के साथ उसके तीन बच्चे भी मारे गए. अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के बाद से अबू बकर अल-बगदादी दुनिया का मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी था.

आईएस का मुखिया अपनी मौत के समय 48 वर्ष का था, उसने धर्म के नाम पर हजारों नागरिकों की हत्या करवाई. क्रूर दंड के जरिए आतंकी संगठन आईएस ने क्षेत्र में अपना शासन लागू किया, जो इस्लाम की रीति-रिवाजों पर आधारित था. आतंकी बगदादी के शासनकाल को विशेष रूप से बर्बर तरीकों के लिए याद किया जाएगा, जिसमें युद्ध, भयावहता, यातनाओं और फांसी के दर्दनाक वीडियो शामिल हैं.

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आईएस सरगना बगदादी की फाइल फोटो

जर्मन शेफर्ड के समान बेल्जियन मेलिनॉइस नस्ल का कोनान अक्टूबर के अंत में अल-बगदादी के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल था. उत्तर-पश्चिमी सीरिया में एक सुरंग में वह बगदादी का तबतक पीछा किया, जबतक आईएस सरगना चारों तरफ से घिर नहीं गया, वहां उसने खुद को विस्फोटकों से उड़ा दिया था. राष्ट्रपति ट्रंप ने तब ट्वीट किया था कि कुत्ते ने अल-बगदादी के खिलाफ अभियान में प्रमुख भूमिका निभाई थी और अभियान में घायल हो गया था.

7-अमेरिका-तालिबान शांति वार्ता

कभी तालिबान के नाम का खौफ खाने वाली दुनिया अब एक नया घटनाक्रम देखने जा रही है. आतंकी संगठन तालिबान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहा है. हालांकि पिछले तीन महीने से यह समझौता खटाई में पड़ गया था और खुद राष्ट्रपति ट्रंप इससे पल्ला झाड़ चुके थे, लेकिन अब इसके अमली जामा पहनने के संकेत मिलने लगे हैं. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान अपने हमले रोकने के लिए तैयार हो गया है. इसके बाद उम्मीद जगी है कि अमेरिका और तालिबान जल्द ही शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.

दोनों पक्षों के बीच सितंबर महीने में वार्ता हुई थी लेकिन इसके ठीक बाद अमेरिका कर्मचारी पर तालिबानी हमले ने शांति वार्ता को बेपटरी कर दिया. अब इसके नए सिरे से शुरू होने के संकेत हैं. अगर यह समझौता हो जाता है तो तालिबानी आतंक में कमी तो आएगी ही, अमेरिकी सैनिक भी शांतिपूर्वक अफगानिस्तान से स्वदेश लौट जाएंगे. राष्ट्रपति ट्रंप को इसी दिन का इंतजार है.

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8-सीरिया पर तुर्की का हमला

सीरिया से अमेरिकी सेना क्या हटी, तुर्की ने उसपर धड़ाधड़ बम बरसाना शुरू कर दिया. तुर्की सेना ने सीरिया के कुर्दिश लड़ाकों को निशाना बनाया. इस हमले का असर अमेरिका सहित यूरोप और समग्र दक्षिण एशिया पर देखा गया. भारतीय विदेश मंत्रालय को भी आगे आना पड़ा और एक बयान जारी कर कहा गया कि तुर्की सीरिया की आजादी का खयाल करे.

तैयप एर्दोगन की फाइल फोटो

बता दें, बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का ऐलान किया था. इसके साथ ही सीरिया के कुछ क्षेत्रों से अमेरिकी सेना वापस आने लगी. इसके तुरंत बाद तुर्की की सेना ने वहां मौजूद कुर्दिश लड़ाकों पर हमला बोलना शुरू कर दिया. खुद तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने ट्विटर पर इन हमलों का ऐलान किया था.

इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फौरन हरकत में आए और उन्होंने तुर्की को आगाह कर दिया कि अगर उसने अपना हमला नहीं रोका तो उसे बर्बाद कर देंगे. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक्शन की शुरुआत भी कर दी और तुर्की के लिए स्टील टैरिफ में बढ़ोतरी का ऐलान किया. साथ ही 100 मिलियन यूएस डॉलर की डील खत्म करने की घोषणा की. इसके बाद तुर्की घुटने टेकने पर मजबूर हुआ और उसने संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया.

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9-श्रीलंका में आतंकी हमला

श्रीलंका में अप्रैल महीने में सीरियल बम धमाकों ने तबाही मचा दी. तीन चर्च समेत 6 अलग-अलग जगह हुए इन बम धमाकों में 200 लोगों की मौत हो गई. दो चर्चों के अंदर आत्मघाती बम धमाके किए गए. ये हमले श्रीलंका की राजधानी कोलंबो समेत तीन शहरों में किए गए. ईस्टर पर्व के मौके पर जब ईसाई लोग चर्चों में प्रार्थना करने पहुंचे थे, उस वक्त धमाके हुए. जिसके चलते बड़ी तादाद में जान माल की हानि हुई.

इस हमले के तार भारत से भी जुड़े और यहां केरल और तमिलनाडु में कई जगह छापेमारी की गई. इसके पीछे दुर्दांत आतंकी संगठन आईएसआईस का हाथ बताया गया. दुनिया के कई देशों में इस वारदात के सुराग ढूंढे गए और जांच अब भी जारी है. अलग अलग जगहों पर हुए धमाकों के पीछे कुल 9 हमलावर शामिल थे जिनमें एक महिला भी है.

श्रीलंकाई मीडिया और वहां के कुछ मंत्रियों ने यहां तक कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आपसी झगड़े के चलते देश में इतनी बड़ी सुरक्षा चूक हुई और इंटेलिजेंस इनपुट के बावजूद उस पर गौर नहीं किया गया. इसका फायदा आतंकियों ने उठाया और एक साथ कई धमाके कर वे आसानी से चलते बने. इसका असर वहां के संसदीय चुनाव पर दिखा और मौजूदा राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री की कुर्सी जाती रही.

न्यूजीलैंड में भी हमला

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में 15 मार्च के दिन दो मस्जिदों पर आतंकवादी हमले हुए जिसमें 51 लोगों की मौत हो गई. इस आतंकी हमले को 28 साल के ऑस्ट्रेलियाई ब्रेंटन टैरेंट ने अंजाम दिया था जिस पर हत्या के 50 मामले और हत्या की कोशिश के 39 आरोप हैं. इस घटना के तार श्रीलंका धमाकों से भी जोड़े गए. श्रीलंका के रक्षामंत्री रुवन विजेवर्दने ने कहा था कि ईस्टर पर हुए आत्मघाती हमले, मार्च में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की मस्जिदों में हुई गोलीबारी से जुड़े हैं.

इन बम विस्फोटों के कुछ सप्ताह पहले श्रीलंका सरकार के कुछ अधिकारियों को एक खुफिया मेमो भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि एक आतंकी समूह ने न्यूजीलैंड में एक दक्षिणपंथी कट्टरवादी की ओर से की गई गोलीबारी के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर चरमपंथी पोस्ट डालना शुरू कर दिा है.

10-इजरायल में नेतन्याहू की विदाई  

इजरायल में सितंबर में हुए प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव का नतीजा साफ नहीं आ पाया. एक बार फिर हालात कुछ ऐसे बने कि कोई भी पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती. बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 31 सीटें, विपक्षी दल के नेता बैनी गैंट्ज की पार्टी को 33 सीटें मिली. ऐसे में अगर जल्द ही सरकार का गठन नहीं होता है तो राष्ट्रपति की ओर से एक बार फिर चुनाव का आदेश दिया जाएगा.

यानी इजरायल एक साल में तीसरी बार आम चुनाव की कगार पर खड़ा है. पिछले महीने नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज ने घोषणा कर दी कि वे सरकार नहीं बना पाएंगे. इससे पहले राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया था लेकिन वे इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में 61 सदस्यों का समर्थन नहीं हासिल कर सके थे.

बेंजामिन नेतन्याहू की फाइल फोटो

बेंजामिन नेतन्याहू 2009 से इजरायल के प्रधानमंत्री हैं और फिलिस्तीन के प्रति अपनी आक्रामक नीति के लिए चर्चा में रहते हैं. बीते दिनों उन्होंने ऐलान किया था कि अगर वे फिर सत्ता में आते हैं तो वेस्ट बैंक-जॉर्डन हिल के हिस्सों पर कब्जा कर वहां पर यहूदी कॉलोनी बसाएंगे. बेंजामिन नेतन्याहू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती की चर्चा हमेशा होती रही है.

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