वूमन पॉवर: मिलिए NIA की 3 टॉप कॉप्स से, आतंक से जुड़े केसों की जांच है इनके जिम्मे

NIA में कम से कम ऐसी तीन लेडी कॉप हैं जो आतंक से जुड़े कुछ मामलों की जांच की अगुआई कर रही हैं. इनके नाम हैं सोनिया नारंग, संजुक्ता पाराशर और प्रतिभा आंबेडकर.

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सोनिया नारंग सोनिया नारंग

अजीत तिवारी / खुशदीप सहगल / कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 5:59 PM IST

महिलाएं भारत में हर उस क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं जिन्हें अभी तक पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र ही माना जाता था. देश में हुए कुछ बड़े आतंकवादी हमलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है. NIA में कम से कम ऐसी तीन लेडी कॉप हैं जो आतंक से जुड़े कुछ मामलों की जांच की अगुआई कर रही हैं. इनके नाम हैं सोनिया नारंग, संजुक्ता पाराशर और प्रतिभा आंबेडकर.

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सोनिया नारंग और संजुक्ता पाराशर जहां एनआईए के दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर से अपने काम को अंजाम दे रही हैं. वहीं प्रतिभा आंबेडकर एनआईए की हैदराबाद ब्रांच में एसपी के पद पर तैनात हैं.

सोनिया नारंग और संजुक्ता पाराशर को आतंकवाद फंडिंग मामलों की जांच के लिए जम्मू और कश्मीर जाना पड़ा. वहीं प्रतिभा आंबेडकर मक्का मस्जिद, बेंगलुरु और मैसूर ब्लास्ट मामलों की जांच में शामिल रही हैं.

कर्नाटक कैडर की 2002 आईपीएस बैच ऑफिसर सोनिया नारंग एनआईए में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल हैं. उन्होंने कश्मीर टेरर फंडिंग केस को सुपरवाइज किया. सोनिया नारंग हुर्रियत टेरर फंडिंग केस की जांच के लिए जम्मू पहुंची थीं तो उन्हें विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था लेकिन उन्होंने संयम बनाए रखते हुए स्थिति को बड़ी अच्छी तरह निपटा था.  

सोनिया नारंग सुंजवां कैम्प पर हुए आतंकी हमले की जांच से भी जुड़ी रही हैं. झारखंड में नक्सली फंडिंग केस भी उनके तहत रहा. एनआईए में आने से पहले सोनिया नारंग कर्नाटक के बेलगांव में एसपी रह चुकी हैं. अप्रैल, 2017 से वे डेप्युटेशन पर एनआईए में हैं.

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महिला दिवस पर इंडिया टुडे से बातचीत में सोनिया नारंग ने कहा, " महिला पुलिसकर्मी के नाते चीजें आसान रहती हैं. महिलाएं हर चीज़ से अपने तरीके से डील करती हैं. वे मल्टी टास्कर होती हैं. प्रोफेशन में अमूमन महिलाएं अच्छा करती हैं. ऐसा ही पुलिस में है.’ 5 साल के बच्चे की मां सोनिया नारंग पंजाब यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी में गोल्ड मेडलिस्ट हैं.

एनआईए में एसपी के पद पर तैनात संजुक्ता पाराशर 2006 बेच की आईपीएस अधिकारी हैं. असम कॉडर से आने वाली संजुक्ता सुंजवां आतंकी हमले की अग्रणी जांच अधिकारी हैं. संजुक्ता ने भोपाल उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट की जांच को भी सुपरवाइज किया था. कश्मीर टेरर फंडिंग केस की जांच के लिए उन्हें दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद से ग्रस्त इलाकों का दौरा करना पड़ा.

एनआईए में तैनाती से पहले संजुक्ता के नाम से असम में बोडो उग्रवादी कांपते थे. असम में रहते संजुक्ता की अगुआई में चले ऑपरेशन्स में 16 उग्रवादी ढेर हुए थे और 64 से अधिक को गिरफ्तार किया गया था. 

एनआईए में एसपी प्रतिभा आंबेडकर मूल रूप से लखनऊ से हैं. 2007 बैच की यूपी कॉडर की आईपीएस अधिकारी प्रतिभा को एनआईए में तैनाती के चार साल पूरे हो चुके हैं. मक्का मस्जिद से जुडे केस की जांच उन्हीं के पास है. इसके अलावा वे चर्चगेट ब्लास्ट और मैसूर ब्लास्ट केसों में मुख्य जांच अधिकारी रह चुकी हैं.

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प्रतिभा का कहना है कि एनआईए में रहते हुए उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है. प्रतिभा के मुताबिक पुलिस और एनआईए की जांच में काफी अंतर है. राज्य पुलिस की जांच के दौरान टॉप लेवल पर आप अभियोजन में शामिल नहीं रहते. लेकिन एनआईए में आपको हर स्तर पर गहराई से शामिल रहना पड़ता है. ये सीखने की एक प्रक्रिया है.

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