कृषि और ग्रामीण विकास एक मंत्री को, क्या मास्टरस्ट्रोक साबित होगा मोदी का यह कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपा है. यह दोनों मंत्रालयों को जोड़ने की एक कोशिश है, ताकि अलगाव की स्थिति न बने और काम का समन्वय बेहतर तरीके से हो सके.

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पीएम नरेंद्र मोदी। पीएम नरेंद्र मोदी।

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2019,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपा है. यह दोनों मंत्रालयों को जोड़ने की एक कोशिश है, ताकि अलगाव की स्थिति न बने और काम का समन्वय बेहतर तरीके से हो सके. मोदी सरकार का ग्रामीण विकास में ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा रहा है. लेकिन इसकी सफलता का फायदा कृषि के रूप में नहीं मिला. ग्रामीण विकास के तहत साल 2014 से 2019 के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 1.55 लाख करोड़ घर बनाए गए. जबकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2.18 लाख किलोमीटर की सड़क तैयार की गईं.

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2 अक्टूबर 2014 से लेकर स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत 9.58 करोड़ टॉयलेट बनाए गए. उज्जवला स्कीम के तहत अप्रैल 2015 से अब तक 11.28 करोड़ नए एलपीजी कनेक्शन बांटे गए. प्रधान मंत्री सौभाग्य योजना के तहत बिना बिजली वाले ग्रामीण परिवारों (कुल 21.45 करोड़ में से) की संख्या 2.63 करोड़ से घटाकर 18,734 तक पहुंच गई.

लेकिन इन सबके बीच कृषि क्षेत्र को वह फायदा नहीं मिला जो होना चाहिए था. ग्रामीण विकास पर जिस तरह का फोकस दिखा, डेडलाइन तय की गई और स्कीमों को लागू किया गया, वैसा फोकस और स्केल कृषि की स्कीमों में नदारद दिखा. उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों से ज्यादा इंश्योरेंस कंपनियों को फायदा हुआ.

जितना कंपनियों को प्रीमियम मिला, वह क्लेम भुगतान से ज्यादा था. सही सिस्टम और फसल नुकसान का सही आकलन न होने के कारण क्लेम भुगतान में खासी देरी हुई. अन्य स्कीमों जैसे ई-नैम (पूरे देश की कृषि मंडियों को जोड़ने वाला पोर्टल), सॉइल हेल्थ कार्ड्स, परंपरागत कृषि विकास योजना या राष्ट्रीय गोकुल मिशन का भी जमीन पर गहरा प्रभाव नहीं दिखा.

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पीएम नरेंद्र मोदी भले ही 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात करते रहे हों लेकिन उनका पहला कार्यकाल एग्रीकल्चर इनकम के लिए अच्छा नहीं रहा. साल 2014 से लेकर 2019 तक कृषि क्षेत्र के सकल मूल्य में औसत वार्षिक वृद्धि सिर्फ 2.9 (स्थिर कीमतें) प्रतिशत हुई जबकि वर्तमान मूल्य में इजाफा सिर्फ 7.6 प्रतिशत.

दोनों मंत्रालयों को एक ही मंत्री को दिए जाने से काम बेहतर होगा. इसे सुधार की दिशा में बेहतर कदम माना जा रहा है. भले ही मनरेगा को ग्रामीण योजना के तौर पर देखा जाता हो लेकिन अगर उसे कृषि से जोड़कर व्यापक नजरिए से देखें तो उसने किसानों की आय दोगुनी करने का काम किया.

जून 2018 में मुख्यमंत्रियों के एक समूह ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए बैठक की थी. इस पैनल ने सिफारिशें नीति आयोग को सौंपी थीं. माना जा रहा है कि सिफारिशों को लागू करने के बाद मोदी सरकार का 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सपना पूरा हो सकता है.

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