लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम बंगाल में तोड़ी गई ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति पर अब ममता सरकार एक्टिव मोड में नजर आ रही हैं. ममता सरकार ने विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने की जांच के लिए समिति का गठन किया है.
पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रख्यात समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने के मामले की जांच के लिए सोमवार को पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया. इस जांच समिति की अध्यक्षता नए गृह सचिव ए बंधोपाध्याय करेंगे और कोलकाता के पुलिस आयुक्त अनुज शर्मा, पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त जावेद शमीन और विद्यासागर कॉलेज के प्राचार्य गौतम कुंडू इस समिति के अन्य सदस्य हैं.
ममता बनर्जी ने इस मामले की जानकारी देते हुए राज्य सचिवालय में कहा, 'चुनावों के दौरान शरारती तत्वों ने विधासागर की प्रतिमा तोड़ दी. हमने एक समिति का गठन किया है. वह मामले एवं उनके कारणों का पता लगाएगी.' मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में 2 एफआईआर पहले ही दर्ज कर ली गई हैं और 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
बता दें कि सातवें चरण के लिए मतदान से एक हफ्ते पहले पश्चिम बंगाल में हिंसा हुई थी. उत्तर कोलकाता में बीजेपी कार्यकर्ताओं और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई और कॉलेज में स्थित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ दी गई. ये तब हुआ था जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उत्तरी कोलकाता के एक हिस्से में रोड शो कर रहे थे. रैली के दौरान भड़की हिंसा के बाद कॉलेज में लगी ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति को कुछ तत्वों ने तोड़ दिया. मूर्ति टूटने के बाद इस मसले पर खूब बवाल हुआ.
विद्यासागर की महत्ता को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए. तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को कुछ 'सबूत' देकर कहा कि मूर्ति तोड़ने के पीछे बीजेपी कार्यकर्ता थे, वहीं पीएम मोदी ने हिंसा और तोड़फोड़ के लिए तृणमूल कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया. पीएम मोदी ने खुद वादा किया था कि जहां पर विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी गई है, वहीं पर वे विद्यासागर की मूर्ति लगवाएंगे.
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