छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के गांव अचानकपुर में गर्मी आते ही पानी की किल्लत से लोगों की सांस फूल जाती है. हर साल लोगों को गर्मी के मौसम में ना केवल प्यासा रहना होता है बल्कि दिनचर्या के लिए भी पानी जुटाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है. इस इलाके में लगभग आधा दर्जन तालाब है लेकिन जनवरी और फरवरी का महीना आते ही उनका पानी सूखने लगता है. फिर मार्च, अप्रेल, मई और जून का महीना ग्रामीणों पर इतना भारी पड़ता है कि ज्यादातर घर परिवार के लोग गांव से पलायन करना ही मुनासिब समझते हैं.
गर्मी के मौसम में गांव में वही लोग नजर आते है जिनके घरो में मवेशी पाले गए हैं. बाकी की आबादी पूरे चार महीने अपने रिश्तेदारों के यहां डेरा डालने में ही अपनी भलाई समझती है. लेकिन इस बार अचानकपुर की फिजा रातों-रात बदल गयी है . यहां रहने वाली मानसी के घर के सामने हैण्ड पम्प जो लगा गया है. ये हैण्ड पम्प मानसी की सूझबूझ से लगा है. वो मानसी जो मात्र 10 साल की है और गांव के सरकारी स्कूल की कक्षा छह में पढ़ती है.
दरअसल गर्मी आते ही अचानकपुर के ग्रामीणों का पारा सातवें आसमान में पहुंच जाता है. एक तो भयंकर गर्मी और दूसरी ओर दूर-दूर तक पानी का नामोनिशान नहीं होता. यही बात सोच कर इस इलाके के ग्रामीण कभी सरकार को कोसते हैं तो कभी अपनी किस्मत पर रोते थे. एक दिन स्कूल आये कुछ ग्रामीणों ने शिक्षकों से पानी की किल्लत की परेशानी साझा की. मानसी भी स्कूल में ही मौजूद थी, वो अपने घर-परिवार से लेकर स्कूल तक पानी को लेकर गांव में होने वाली परेशानी से वाकिफ थी. मानसी ने बड़े बुजुर्गों की हर बात सुनी और फिर स्कूल से घर चली आयी.
दूसरे दिन मानसी जब स्कूल पहुंची तो उसकी कॉपी में एक पत्र लिखा हुआ था. यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर संबोधित था. मानसी ने यह पत्र अपने शिक्षक को दिखाया और उनसे इस पत्र को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की मंशा जाहिर की. शिक्षक ने मानसी के इस खत को बड़ी गंभीरता से लिया और फिर प्रधानमंत्री कार्यालय का पता खोजा गया. इस दौरान शिक्षकों से लेकर मानसी की बहन और उसका चचेरा भाई भी इस खत को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए सक्रीय हो गए. प्रेषित पत्र को पीएमओ की साइट पर अपलोड कराया गया.
करीब दो हफ्ते बाद गांव में ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग का अमला अचानक गांव में आ धमका. विभाग के आधा दर्जन कर्मचारी और अधिकारी समेत बोरिंग मशीन का पूरा लाव-लश्कर उनके साथ था. कर्मचारी मानसी के घर का पता पूछ रहे थे. अफसरों ने मानसी और उसके परिजनों से बात की और फिर उनके घर के करीब ही सर्वे का काम शुरू हुआ. जमीन की पड़ताल हुई और बोरिंग का काम शुरू हो गया. सुबह लगभग ढाई इंच पानी की फुहार जमीन के भीतर से फूट पड़ी.
पानी की धार देख कर ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना ना रहा. मानसी को लोगों ने हाथों-हाथ लिया. मानसी ने तब जाकर लोगों को अपने उस खत के बारे में बताया जो उसने प्रधानमंत्री को लिखा था. मानसी और उसके परिजन सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. मानसी की मां स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं और गांव के ही उप स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं. जबकि परिवार के बाकी सदस्य खेती-किसानी करते हैं.
सुनील नामदेव