मॉब लिंचिंग मामला: SC ने अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई से किया इनकार

मॉब लिंचिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार किया. नई याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कई राज्य सरकारें लिंचिंग को नहीं रोक पा रही है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला नार्मल कोर्स के हिसाब से सुनवाई पर आएगा.

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सांकेतिक तस्वीर (फोटो- aajtak.in) सांकेतिक तस्वीर (फोटो- aajtak.in)

अनीषा माथुर / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 6:33 PM IST

मॉब लिंचिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार किया. नई याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कई राज्य सरकारें लिंचिंग को नहीं रोक पा रही है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला नॉर्मल कोर्स के हिसाब से सुनवाई पर आएगा.

आपको बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए कहा था कि गोरक्षा के नाम पर भीड़ की हिंसा अपराध है. कोई कानून को हाथ में ले, इसको कोर्ट किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं कर सकती है. कोर्ट ने कहा था कि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है.

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इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के खिलाफ गाइडलाइंस जारी की थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिंदुस्तान में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती है. कानून का शासन कायम रखने का काम सरकार का है. कोई भी नागरिक कानून को अपने हाथ में ले सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने गाइडलाइंस में यह भी कहा कि मॉब लिंचिंग के खिलाफ संसद कानून बनाए और सरकारों को संविधआन के मुताबिक काम करना चाहिए.

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकार मॉब लिंचिंग के पीड़ितों को मुआवजा भी दे. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा था कि वो मॉब लिंचिंग पर  सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का कड़ाई से पालन करें. इन  सबके बावजूद देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं.

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ताजा मामला झारखंड के खरसवां का है, जहां पर चोरी करने के शक में भीड़ ने तबरेज अंसारी नामक युवक को पीट-पीटकर मार डाला था. पुलिस के हवाले करने से पहले भीड़ ने तबरेज अंसारी को 18 घंटे से ज्यादा समय तक पीटा था. इसके बाद तबरेज अंसारी को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई थी. यह मामला संसद में भी उठाया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस घटना की कड़ी निंदा की थी.

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