व्यभिचार मामलाः SC ने पूछा- क्या पुरुषों की निजी मल्कियत हैं महिलाएं?

व्यभिचार मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, और देश की शीर्ष अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 497 पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि बराबर के अपराध के लिए सिर्फ पुरुषों को ही क्यों सजा दी जाए.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 02 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

कोई विवाहित महिला अगर किसी विवाहित पुरुष से संबंध बनाती है और मामले का खुलासा हो जाए तो सिर्फ पुरुष ही दोषी क्यों? जबकि इस अपराध में बराबर की जिम्मेदार महिला भी है. सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने व्यभिचार को लेकर भारतीय दंड संहिता की धारा 497 पर बहुत हद तक अपना रुख तो साफ कर ही दिया, साथ ही सवाल भी किया कि क्या महिलाएं पुरुष की निजी मल्कियत है.

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सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ आईपीसी की धारा 497 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान इस धारा के प्रावधान पर कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा अगर अविवाहित पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ संबंध बनाता है तो वो व्याभिचार नहीं होता, लेकिन यही काम कोई विवाहित पुरुष करे तो अपराध. जबकि महिला अपराध में हिस्सेदार होकर भी जिम्मेदार नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह की पवित्रता को बनाए और बचाए रखने की जिम्मेदारी पति और पत्नी दोनों की होती है. ऐसे में विवाहित महिला अगर किसी विवाहित पुरुष से संबंध बनाती है तो सिर्फ पुरुष ही दोषी क्यों? जबकि महिला भी अपराध में बराबर की जिम्मेदार है.

देश की शीर्ष अदालत ने कहा कि धारा 497 के तहत सिर्फ पुरुष को ही दोषी माना जाना आईपीसी का एक ऐसा अनोखा प्रावधान है कि जिसमें केवल एक पक्ष को ही दोषी माना जाता है.

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कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि अगर विवाहित महिला के पति की सहमति से कोई विवाहित पुरुष संबंध बनाता है तो वो अपराध नहीं है. इसका मतलब क्या महिला पुरुष की निजी मिल्कियत है कि वो उसकी मर्जी से चले.

संविधान पीठ में इस कानूनी और सामाजिक तौर पर  पेचीदा माने जा रहे इस मामले पर सुनवाई अगले हफ्ते भी जारी रहेगी.

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