टारपीडो डील रद्द होने के बाद 'ब्लैक शार्क' के विकल्प खोज रहा है रक्षा मंत्रालय

रक्षा मंत्रालय के इस फैसले से 'अरिहंत' क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के तैयार में होने में दो से तीन साल का समय और लग सकता है.

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ब्रजेश मिश्र / संदीप उन्नीथन

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2016,
  • अपडेटेड 12:45 PM IST

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के बाद भारत सरकार की ओर से ब्लैक शार्क टारपीडो की डील रद्द करने से फैसले का सीधा असर चार 'अरिहंत' क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBNs) के निर्माण पर पड़ेगा. चार में से तीन पनडुब्बियों को भारी वजन वाले ब्लैक शार्क टारपीडो से लैस करना था. रक्षा मंत्रालय ने बीते सप्ताह इस डील को रद्द किया है.

रक्षा मंत्रालय के इस फैसले से 'अरिहंत' क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के तैयार में होने में दो से तीन साल का समय और लग सकता है.

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'ब्लैक शार्क के विकल्पों पर हो रहा है विचार'
टारपीडो बनाने वाली कंपनी अलेनिया सिस्टेमी सुबाक्वेई (WASS) इटली की हथियार निर्माता कंपनी फिनमैकेनिका का ही हिस्सा है. रक्षा मंत्रालय को इस बात का अंदेशा था कि जिस तरह फिनमैकेनिका की एक कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड ने वीवीआईपी चॉपर डील हासिल करने के लिए रिश्वत दी थी, कहीं वैसा ही इस मामले में भी न हो. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'ब्लैक शार्क के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इस स्तर पर फिलहाल उसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं दी जा सकती.' उन्होंने न्यूक्लियर पनडुब्बी प्रोजेक्ट पर भी कुछ बोलने से इनकार कर दिया.

बता दें कि टारपीडो एक तरह से स्वत: चालित हथियार होते हैं, जिनके अगले हिस्से में विस्फोटक लगा होता है. किसी भी पनडुब्बी के लिए यह प्रारंभिक हथियार होते हैं और टारपीडो ट्यूब से फायर किए जाने के बाद ये अपने टारगेट को आसानी से भेद सकते हैं.

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3500 किमी तक है रेंज
अरिहंत की क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां धरती, आकाश और पानी में हथियारों को लॉन्च करने में सक्षम हैं. इसमें चार से आठ न्यूक्लियर मिसाइलों को ले जाने की क्षमता होती है. इनकी रेंज 3500 किमी तक है.

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