पेन बनाने वाली रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी ने भारतीय बैंकों से पैसा लेकर विदेशों में जायदाद खरीद ली है. बैंकों को कर्ज चुकाने का झांसा देकर वह विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदता रहा. देश में उसके पास इतनी जायदाद ही नहीं कि लोन की रिकवरी हो सके. बैंकों ने कोठारी की कुछ संपत्ति जब्त की है जिससे सिर्फ 100 करोड़ मिलेंगे.
सवाल है कि बैंक कोठारी जैसे धनकुबेरों को कर्ज देने में इतने दरियादिल कैसे दिखाते हैं. कोठारी के मामले में भी बैंकों के काम करने का तरीका सैंया के कोतवाल होने वाला दिखा. 'आजतक' को मिली जानकारी के मुताबिक कोठारी ने लोन के पैसे विदेशों में काफी बड़ी जायदाद खरीद ली है. बैंकों को कर्ज चुकाने का झांसा देकर वह विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदता रहा. देश में उसके पास इतनी जायदाद ही नहीं कि लोन की रिकवरी हो सके. बैंकों ने कोठारी की कुछ संपत्ति जब्त की है जिससे सिर्फ 100 करोड़ मिलेंगे.
कान में तेल डाल सोते रहे अफसर
खबर है कि जब पहली बार कर्ज की रकम डूबती नजर आई तो बैंक अफसरों ने हेडक्वार्टर को पूरा मामला बताया, लेकिन ऊपर बैठी अफसरशाही कान में तेल डालकर सोती रही और कोठारी दोनों हाथों से कर्ज के पैसे डूबोता रहा.
देश से भागने की योजना
पहले कर्ज लेकर बैंकों को चूना लगाओ, फिर कर्ज के पैसे से ऐश करो और जब फंसने की नौबत आए तो देश से फुर्र हो जाओ. विक्रम कोठारी भी शायद इसी ताक में था, लेकिन उसका खेल खराब हो गया. सीबीआई ने उसके लिए फंदा खड़ा कर दिया है.
कैमरे पर आने को तैयार नहीं
विक्रम कोठारी ताल ठोककर देश में होने का दावा कर रहा है, लेकिन कैमरे के सामने आने, मीडिया के सवालों का सामना करने की हिम्मत नहीं हो रही है. 'आजतक' ने विक्रम कोठारी की तलाश की लेकिन वो किस बिल में छिपा है, इसका पता नहीं चल पाया. विक्रम कोठारी के आलीशान बंगले पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसरा है.
नहीं बताया पता
साफ था कि चौकीदारों को किसी भी कीमत पर कैमरा वालों को अंदर ना आने देने का आदेश था. कोठारी के कारिदें कठपुतली की तरह वही कर रहे थे, वही कह रहे थे जो उसके मालिक ने कहा था. हमारी कोशिशों के बावजूद बंगले के गार्ड ने ना तो कोठारी का अता-पता बताया और ना ही किसी परिवार वालों से बात कराई.
'आजतक' की टीम कोठारी का पता लगाने रोटोमैक के दफ्तर भी गए तो वहां भी कर्मचारियों की जुबान पर ताले लटके मिले. रोटोमैक के कर्मचारी अपने आका के आदेश का पालन कर रहे थे. 'आजतक' के हर सवाल का रटा-रटाया जवाब दे रहे थे, हमने पूरी कोशिश की, लेकिन कोठारी के कारिंदे टस से मस नहीं हुए.
केशवानंद धर दुबे