वर्षा जल संरक्षण पर 'बात ज्यादा काम कम', महज 8% ही पानी का होता है संचयन

जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर तेजी से काम किया जाना चाहिए और वर्षा जल संरक्षण को बढ़ाकर 15 फीसदी तक लाया जाना चाहिए. नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि 2030 तक भारत की 40 फीसदी आबादी के पास पीने की पानी की किल्लत होगी और उन्हें खासा संघर्ष करना पड़ेगा.

Advertisement
जल संकट से लंबे समय से जूझता रहा बुंदेलखंड (फोटो-शेखर घोष) जल संकट से लंबे समय से जूझता रहा बुंदेलखंड (फोटो-शेखर घोष)

सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 15 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST

जल संकट पूरे देश में तेजी से गहराता जा रहा है. अभी चेन्नई समेत देश के कई इलाकों में लोग जल संकट से परेशान हैं. धीरे-धीरे इसका दायरा और बढ़ता जाएगा और हर ओर यह संकट दिखने लगेगा. जल संकट को टालने के लिए लगातार जल संरक्षण की बात की जा रही है, लेकिन इस संबंध में जिस तरह से चीजें हो रही हैं उससे यही लगता है कि अभी भी यह जरूरी अभियान महज रस्म अदायगी ही है. हालांकि दिल्ली जल बोर्ड ने बारिश के जल का संरक्षण नहीं करने के कारण अपने ही उपभोक्ताओं पर 48 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया है.

Advertisement

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि महज 8 फीसदी बारिश के पानी का सही तरीके से इस्तेमाल और हार्वेस्टिंग किया जाता है. इस तरह से देखा जाए तो 90 फीसदी से ज्यादा बारिश का पानी बह जाता है और इसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन देश में जिस तरह से जल संकट है उसके लिहाज से वर्षा जल संरक्षण बेहद जरूरी हो जाता है.

देश में एक बार फिर बारिश का सीजन है और लगातार बारिश के कारण कई शहर पानी से लबालब हैं लेकिन उन्हें संग्रहित नहीं किया जा रहा. खास बात यह है कि ग्रामीणों की तुलना में शहरी क्षेत्र के लोग ज्यादा पानी बर्बाद करते हैं और संरक्षण के मामले में शहरी लोग फिसड्डी भी हैं.

जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर तेजी से काम किया जाना चाहिए और वर्षा जल संरक्षण को बढ़ाकर 15 फीसदी लाया जाना चाहिए. नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है 2030 तक भारत की 40 फीसदी आबादी के पास पीने की पानी उपलब्धता नहीं होगा और उन्हें खासा संघर्ष करना पड़ेगा.

Advertisement

21 शहरों पर संकट

राजधानी दिल्ली समेत बेंगलुरू, चेन्नई और हैदराबाद समेत 21 बड़े शहरों में 2020 तक जलस्तर बेहद नीचे चला जाएगा. इस कारण 10 करोड़ लोग जल संकट का सामना कर रहे होंगे.

नरेंद्र मोदी के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद सरकार जल संरक्षण की बात जोर शोर से कर रही है . प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान का वादा पूरा करते हुए जल संसाधन और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालयों को मिलाकर 'जल शक्ति मंत्रालय' बनाया. सरकार ने यह अहम काम गजेंद्र सिंह शेखावत को सौंपते हुए उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया जबकि रतन लाल कटारिया को राज्य मंत्री बनाया.

मोदी सरकार 2.0 के पहले बजट के ऐलान से पहले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 'जल शक्ति अभियान' शुरू किया. इस अभियान के तहत पानी की कमी का सामना कर रहे 256 जिलों के 1,592 खंडों पर 5 बिंदुओं पर जोर दिया जाएगा. इनमें जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन, पेयजल की सफाई, परपंरागत और दूसरे जल निकायों के नवीनीकरण, जल के दोबारा इस्तेमाल और ढांचों के पुनर्भरण तथा जलविभाजन विकास और गहन वनीकरण शामिल है. 256 जिलों में से सबसे ज्यादा राजस्थान (29), तमिलनाडु (27) और तेलंगाना (24) राज्य के जिले शामिल किए गए हैं. इन जिलों पर काम के लिए अपर सचिवों और संयुक्त सचिवों तक के अधिकारियों को लगाया गया है.

Advertisement

NRDWP के फंड में 69 फीसदी वृद्धि

एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई और सही फसल चुनने के लिए जागरूक भी किया जाएगा तो दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में बेकार पानी को औद्योगिक और कृषि क्षेत्र के उद्देश्य के लिए तैयार कराया जाएगा. 256 जिलों के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत नए बजट में किसी अलग तरह से बजट का आवंटन नहीं किया गया है, इनके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जारी कई योजनाओं के जरिए फंड जुटाना होगा.

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मैनेजमेंट यानी राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) के लिए 9,150.36 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जो 2018-19 के बजट (5,391.32 रुपये) की तुलना में 69 फीसदी ज्यादा है. हो सकता है कि इस राशि को तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के कई बड़े शहरों में पानी की किल्लत को देखते हुए बढ़ाया गया है. वित्त मंत्री के अनुसार, 2024 तक 'हर घर नल, हर नल जल' की योजना के तहत मोदी सरकार का लक्ष्य देशभर में हर घर जल पहुंचाने की है.

स्वच्छ पेयजल के लिए 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा दिए गए हैं. इनमें से 8245 करोड़ रुपये से नदियों के विकास पर खर्च किया जाएगा और इसके माध्यम से 450 नदियों को आपस में जोड़ा जाएगा. पिछली सरकार में 60 नदियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था. हालांकि जल संरक्षण की दिशा में पिछले 70 सालों में कोई ठोस काम नहीं हुआ, लेकिन अब इस पर तेजी से काम किए जाने की जरूरत है.

Advertisement

दिल्ली में 11,635 लोगों पर जुर्माना

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई क्षेत्र लंबे समय से जल संकट से जूझ रहे हैं और यहां पर जल संचयन अभियान भी चलाया जा रहा है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक परिणाम निकल कर नहीं आया. दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने लोगों में इसके प्रति जागरुकता के लिए उन 11,635 उपभोक्ताओं पर 48 करोड़ का जुर्माना लगाया जिनके पास 500 वर्ग मीटर से ज्यादा का भूभाग है, लेकिन उन लोगों ने अपने यहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर तैयार नहीं किया.

दिल्ली के लिहाज से देखें तो भूजल स्तर गिरने से पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है. दिल्ली में 13,491 मिलियन क्यूसेक मीटर (एमसीएम) पानी उपलब्ध है जिसमें 10,238 एमसीएम पानी खारा है. महज 3,207 एमसीएम पानी ही साफ सुथरा बचा है. पानी की मांग बढ़ने के कारण दिल्ली में भूजल दोहन लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन उसमें रिचार्ज कम हो रहा है. बारिश के कारण 175 मिलियन क्यूसेक मीटर (एमसीएम) पानी को संग्रहित कर भूजल के स्तर बढ़ाया जा सकता है.

पानी की बेवजह खर्च

भारत एक कृषि प्रधान देश है और 50 फीसदी से ज्यादा लोग खेती पर निर्भर है. देश की सवा सौ करोड़ की आबादी के लिए अनाज का उत्पादन करने वाले किसान काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहते हैं और पिछले कुछ सालों में मॉनसून में उतार-चढ़ाव होता रहा है. पानी का संकट ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में बढ़ता रहा है. ग्रामीण लोग शहरी लोगों का तुलना में पानी बेवजह खर्च नहीं करते, जबकि शहरों में रहने वाले लोग बारिश जल संचयन पर बात तो खूब करते हैं लेकिन इसके प्रति गंभीर नहीं होते.

Advertisement

शहरी क्षेत्र के लोग नहाने (शॉवर के साथ), ब्रश करने, खाना बनाने, बर्तन धोने, टॉयलेट, वॉशिंग मशीन आदि चीजों के जरिए रोजाना औसतन 250 लीटर के करीब पानी इस्तेमाल करते हैं. खेती के लिए पानी की जरूरत तो है ही, साथ में अन्य कार्यों के लिए भी बर्षा जल संचयन किए जाने की जरूरत है. सरकार पिछले कुछ समय से जल संचयन पर चर्चा कर रही है, ऐसे में सरकारी अनुदान का इस्तेमाल करते हुए शहरी क्षेत्रों के लोगों को इस पर गंभीरता से काम करना चाहिए और पानी की कमी को दूर करने में अपना योगदान दें.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement