दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को हरी झंडी मिल गई है. नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने बाईस हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 92 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है. खामोशी के साथ जब ये ट्रेन हवा से बातें करती हुई भागेगी तो दिल्ली-मेरठ की दूरी 48 मिनट में नापी जा सकेगी.
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव राजीव गाबा के मुताबिक ग्यारह साल पहले इस कॉरिडोर की योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड ने 2005 में बनाई थी. तब बीस साल आगे यानी 2035 को ध्यान में रखते हुए ये योजना बनाई गई थी ताकि पूरे क्षेत्र के सभी बड़े शहरों को 150 से 180 किलो मीटर प्रति घंटा की तेज रफ्तार वाली रेल से जोड़ा जा सके. इसका 60 किलोमीटर का हिस्सा तो दिल्ली-मेरठ हाईवे के साथ साथ चलेगा. तब ये बहुप्रतीक्षित योजना बनी तो लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ पाई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया था.
मंजूरशुदा योजना के मुताबिक ये कॉरिडोर सराय काले खां से शुरू होगा और पहले चरण का आखिरी स्टेशन होगा मोदीपुरम. 92 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में लगभग 61 किलोमीटर रेल खंबों पर दौड़ेगी, 30 किलोमीटर भूमिगत और डेढ़ किलोमीटर जमीन पर होगी. ये ट्रेन यमुना के नीचे से भूमिगत सुरंग से होकर गुजरेगी. इस रूट पर कुल 17 स्टेशन होंगे जिनमें से 11 एलिवेटेड होंगे और छह भूमिगत.
150 से 180 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली इस रेल परियोजना की हर ट्रेन में 12 कोच होंगे. कोच भी खास तौर पर डिजाइन किये गये हैं. यानी कुछ कुछ शताब्दी की तरह यानी हवाई जहाज की तरह पुश बैक वाली टू बाई टू सीटें होंगी. हर ट्रेन में एक डिब्बा सुविधाओं से युक्त बिजनेसक्लास टाइप होगा.
राजीव गाबा के मुताबिक एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-अलवर रैपिड रेल कॉरिडोर के रिअलाइनमेंट को भी मंजूरी दी है. ताकि तेज रफ्तार ट्रेन इन पर भी जल्दी से जल्दी चलाने का सपना पूरा हो सके. वैसे सराय काले खां से साहिबाबाद तक का 17 किलोमीटर का रूट और मेरठ से मोदीपुरम का रूट 2024 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
परियोजना के मुताबिक दिल्ली मेरठ आरआरटीएस की इस रैपिड रेल से 2024 तक रोजाना करीब 8 लाख यात्री सफर करेंगे. 2031 में इसका विस्तार भी होगा तो संख्या सवा नौ लाख तक पहुंच जाएगी. और 2041 आते-आते इस रूट पर साढ़े ग्यारह लाख यात्री रोजाना चलेंगे.
सबा नाज़ / संजय शर्मा