आज संसद के शीतकालीन सत्र का सातवां दिन था. संविधान दिवस के मौके पर संसद के सेंट्रल हाल में आयोजित संसद के संयुक्त सत्र को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया. कांग्रेस के सांसदों ने संविधान दिवस समारोह के बहिष्कार का फैसला किया था और वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. इस दौरान कांग्रेस ने संसद परिसर में आंबेडकर प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन भी किया.
सातवें दिन पास हुए दो बड़े बिल
संयुक्त सत्र के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तय समय के मुताबिक शुरू हुई. सोमवार की अपेक्षा संसद की कार्यवाही शांतिपूर्वक चली. बीच-बीच में विपक्ष में हंगामा किया लेकिन उससे कार्यवाही बाधित नहीं हुई. सातवें दिन राज्यसभा में ट्रांसजेंडर पर्सन्स बिल और लोकसभा में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान बिल चर्चा के बाद पास हुआ.
लोकसभा में पेश हुए दो अहम बिल, राज्यसभा में चिट फंड संशोधन बिल पेश
लोकसभा में पुर्नस्थापित किए जाने वाले विधेयकों के अंतर्गत दो अहम विधेयक हुए पेश. हरदीप पुरी ने लोकसभा में दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों में संपत्ति के अधिकार से जुड़ा बिल पेश किया. इसके साथ ही किशन रेड्डी ने दो केन्द्र शासित राज्यों (दमन और दीव को दादर और नगर हवेली) के विलय से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश किया. लोकसभा में इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड, 2019 बिल पेश करने के लिए संतोष गंगवार खड़े हुए थे लेकिन विपक्ष के विरोध के बाद आसन ने उन्हें कल बुधवार को बिल पेश करने का निर्देश दिया.
लोकसभा में ई-सिगरेट बैन बिल और राज्यसभा में चिट फंड संशोधन बिल पर हुई चर्चा
राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने चिट फंड्स अमेंडमेंट बिल 2019 पेश किया और उस पर विस्तृत चर्चा हुई. बुधवार को इस पर चर्चा आगे जारी रहेगी. इसी तरह लोकसभा में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने ई-सिगरेट बैन बिल पेश किया. जिसके बाद सदन में विस्तृत चर्चा हुई. बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री सदन के सामने अपना जवाब प्रस्तुत करेंगे.
लोकसभा अध्यक्ष ने याद दिलाए मौलिक कर्तव्य
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संयुक्त सत्र में कहा कि संविधान ने अगर हमें मौलिक अधिकार दिए हैं तो मौलिक कर्तव्य देकर हमें अनुशासित करने की भी कोशिश की है. देश की संप्रभुता को बनाए रखने का दर्शन दिया है. कर्तव्यों की बात ना कर सिर्फ अधिकार की बात करने से असंतुलन पैदा होता है.
पीएम मोदी बोले- संविधान हमारे लिए सबसे बड़ा और पवित्र ग्रंथ है
पीएम मोदी ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा संविधान हमारे लिए सबसे बड़ा और पवित्र ग्रंथ है. संविधान को अगर दो सरल शब्दों और भाषा में कहना है तो कहूंगा डिग्निटी और इंडियन और यूनिटी और इंडिया. इन्हीं दो मंत्रों को हमारे संविधान ने साकार किया है. नागरिक की डिग्निटी को सर्वोच्च रखा है और संपूर्ण भारत की एकता को अक्षुण्ण रखा है.
पीएम मोदी ने आगे कहा कि अधिकारों और कर्तव्यों के बीच एक अटूट रिश्ता है. इस रिश्ते को महात्मा गांधी ने बखूबी समझाया था. वो कहते थे राइट इज ड्यटी वेल परफॉर्म्ड. उन्होंने लिखा है कि मैंने अपनी अनपढ़ लेकिन समझदार मां से सीखा है कि सभी अधिकार आपके द्वारा सच्ची निष्ठा से निभाए गए अपने कर्तव्यों से ही आते हैं.
अंत में पीएम मोदी ने कहा कि आइए अपने गणतंत्र को हम कर्तव्यों से ओतप्रोत नई संस्कृति की तरफ लेकर जाएं. नेक नागरिक बनें. मैं कामना करता हूं कि यह संविधान दिवस हमारे संविधान के आदर्शों को कायम रखे. हमारे संविधान निर्माताओं ने जो सपना देखा तो उसे पूरा करने की शक्ति दे.
उपराष्ट्रपति ने भी की मूल कर्तव्यों की बात
उपराष्ट्रपति ने वेंकैया नायडु ने सत्र में अपने संबोधन के दौरान कहा कि इस अवसर पर डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर को नमन करता हूं. जिन्होंने इस ब्युटीफुल, ड्यूटीफुल, माइटीफुल संविधान का निर्माण किया. हमें अपना माइंड देश की सेवाकरने पर सेट करना चाहिए. मूल कर्तव्यों का भी पालन करें. और अपने जीवन में नागरिक कर्तव्यों को आत्मसात करें.
राष्ट्रपति बोले- अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संविधान की बात करते हुए कहा कि यह हमारा सर्वोच्च कानून है जो हमारा मार्गदर्शन करता रहता है. हमने विश्व के कई संविधान में उपलब्ध उत्तम नियमों को अपनाया है. हमारा संविधान भारत के लोगों के लिए भारत के लोगों द्वारा निर्मित भारत के लोगों का संविधान है. यह एक राष्ट्रीय दस्तावेज है.
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हमारे संविधान में भारतीय लोकतंत्र का दिल धड़कता है. इस जीवंतता को बनाए रखने के लिए संशोधनों का भी प्रावधान किया गया. 17वीं लोकसभा में 78 महिला सांसदों का चुना जाना हमारे लोकतंत्र की गौरवपूर्ण उपलब्धि है. यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन है.
राष्ट्रपति कोविंद ने आगे मौलिक कर्तव्यों की बात करते हुए कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जरूरत इस बात की है कि हम सब अपने कर्तव्यों को निभाकर ऐसी स्थित उत्पन्न करें जहां अधिकारों का प्रभावी संरक्षण हो सके. मानववाद की भावना का विकास करना भी नागरिकों का एक मूल कर्तव्य है.
aajtak.in