भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लगभग 10 बिल पेंडिंग हैं. इन पेंडिंग बिल को पास कराने के लिए सरकार लोकसभा के चालू सत्र की कार्यवाही बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्षी दल इसे लेकर सहमत नहीं हो रहे.
सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के साथ बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग में सरकार और विपक्षी पार्टी के नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में भी सत्र की कार्यवाही कुछ दिन बढ़ाने पर चर्चा हुई. सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि कई महत्वपूर्ण बिल पेंडिंग हैं. जिनको इसी सत्र में पास कराया जाना जरूरी है. इसलिए सत्र को कुछ दिन के लिए बढ़ाना चाहते हैं.
सत्ता पक्ष के इस प्रस्ताव का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया. विपक्ष ने सरकार के इस प्रस्ताव को पूरी तरीके से खारिज करते हुए कहा कि चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद ही बजट सत्र शुरू हो गया. सभी सांसद इसमें भाग लेने सीधे दिल्ली आ गए थे. वह अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से न तो मिल पाए, और न ही अपने पूर्व कार्यक्रमों को ही पूर्ण कर पाए. विपक्षी नेताओं ने तर्क दिए कि 26 जुलाई के बाद उन्होंने पहले से ही कार्यक्रम बना रखे हैं. जिन्हें स्थगित करना मुश्किल है.
सत्ता पक्ष की हां, विपक्ष की ना
विपक्ष जहां 26 जुलाई को संपन्न हो रहा सत्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमत नहीं हो रहा, वहीं सत्ता पक्ष पेंडिंग बिल पास कराने के लिए सत्र की अवधि बढ़ाने के मूड में है. इसीलिए बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग में भी सरकार ने विपक्ष के सामने अपने मन की बात रखी. इस पर सरकार एक-दो दिन में फैसला ले सकती है.
नहीं चला मॉनसून सत्र, न प्री बजट ही
सत्र की अवधि बढ़ाने के पीछे सरकार की दलील यह है कि इस बार न तो मॉनसून सत्र चला, और न ही प्री बजट सत्र ही. इसलिए आवश्यक कार्यों के लिए सत्र की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए. सरकार की मन्शा है कि तीन तलाक बिल समेत अन्य पेंडिंग बिल इसी सत्र में पारित हो जाएं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं भी सांसदों से कह चुके हैं कि सत्र बढ़ सकता है. बता दें कि चालू सत्र 26 जुलाई को समाप्त हो रहा है.
अशोक सिंघल