Exclusive: देश में सिर्फ 6500 लोगों ने माना, उनके पास रहने के लिए एक से ज्यादा घर

वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इंडिया टुडे से कहा कि टैक्स रिसर्च यूनिट (TRU) के आंकड़े दिखाते हैं कि आकलन वर्ष 2017-18 में दो या दो से अधिक घरों में रहने वालों की संख्या केवल 6,537 है.

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दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 15 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 10:42 AM IST

  • भारत में 1.14 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके पास एक घर का मालिकाना है
  • आयकर बचाने के लिए अपने घरों की वास्तविक संख्या छिपाते हैं लोग
अमीर लोगों के लिए पैसा निवेश करने का पसंदीदा विकल्प है दूसरा घर खरीदना, लेकिन इसे वे अपने आयकर के ब्योरे (income tax declaration) में नहीं दिखाना चाहते. टैक्स रिटर्न के आंकड़ों में यह बात सामने आई है कि भारत का हाउसिंग बाजार कितना अपारदर्शी है, जहां सिर्फ 6,537 लोगों ने यह घोषणा की है कि उनके पास एक से ज्यादा Self occupied घर हैं, जिसमें वे रहते हैं.

वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इंडिया टुडे से कहा, 'टैक्स रिसर्च यूनिट (TRU) के आंकड़े दिखाते हैं कि आंकलन वर्ष 2017-18 में दो या दो से अधिक घरों में रहने वालों की संख्या केवल 6,537 है.'

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कितने लोगों के पास है घर

उक्त अधिकारी का कहना है कि आकलन वर्ष 2017-18 में 4.94 करोड़ लोगों ने रिटर्न फाइल किया. इसके विश्लेषण से पता चलता है कि एक चौथाई (1.14 करोड़) लोगों ने अपनी आवासीय संपत्ति से उन्हें होने वाली आय की घोषणा की है. इन करदाताओं में से 90 फीसदी के पास सिर्फ एक घर है. इनमें से 65 फीसदी ने सूचना दी है कि उनकी आवासीय संपत्ति पर उनका खुद का कब्जा है, यानी वे खुद इसका इस्तेमाल करते हैं. जिन लोगों ने यह स्वीकार किया कि उनके पास रहने के लिए एक से ज्यादा घर हैं, उनकी संख्या सिर्फ 6,537 है.

आयकर अधिकारी का कहना है कि लोग आयकर विभाग से अपने घरों की वास्तविक संख्या छुपाते हैं. उनका कहना है कि ''मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि पिछले कुछ सालों में राष्ट्रीय स्तर पर जितने लोगों ने एक से ज्यादा घर होने की घोषणा की है, उससे ज्यादा सिर्फ गुरुग्राम में हैं.'

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ज्यादा है यह संख्या

रीयल एस्टेट एक्सचेंज फर्म Qubrex के एमडी संजय शर्मा ने इंडिया टुडे से कहा, 'हमारे एजेंट्स के सीमित नेटवर्क और गुरुग्राम के रीयल एस्टेट मार्केट में 15 साल के अनुभव के आधार पर हमारा अनुमान है कि सिर्फ गुरुग्राम में कम से कम 5000 लोग ऐसे हैं जिनके पास दो या ​इससे ज्यादा घर हैं.'

रिपोर्ट क्यों नहीं होते ऐसे मामले

पिछले साल तक नियम था कि अगर आपके पास एक से ज्यादा आवासीय मकान हैं तो आपको संभावित किराये की आय के लिए टैक्स देना पड़ता था. उस समय के नियमों के ​मुताबिक, अगर एक आदमी के पास एक से ज्यादा आवासीय घर हैं तो ​आपके पास विकल्प था कि किसी एक घर को आप अपने रहने के लिए घोषित करें और दूसरे घर के बारे में यह माना जाता था कि आप इसे किराये पर देने के लिए इस्तेमाल करेंगे और उस संभावित आय पर कुछ कटौती के बाद आपको टैक्स देना होता था.

फाइनेंस एक्ट 2019 में सरकार ने दो मकान होने पर एक ​के लिए संभावित किराये के मकान का प्रावधान हटा दिया. हालांकि, दो से ज्यादा आवासीय घरों की संख्या होने पर मकान मालिक पर अब भी वह कानून लागू होता है और उसके लिए संभावित किराये की आय पर टैक्स देना होता है.

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किसी और तरह की संपत्ति की तुलना में हाउसिंग मार्केट में ज्यादा पैसा खपाया जा सकता है. रीयल एस्टेट की कंसल्टेंसी फर्म- ANAROCK के कंज्यूमर सेंटीमेंट सर्वे के मुताबिक, 57 फीसदी लोग रीयल एस्टेट में निवेश करने को प्राथमिकता देते हैं. इसके बाद दूसरा नंबर स्टॉक मार्केट और म्युचुअल फंड का है, जहां लोग निवेश करना चाहते हैं. 13 फीसदी लोग फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने में दिलचस्पी रखते हैं जबकि 5 फीसदी लोग सोने में निवेश करने को तवज्जो देते हैं.

ANAROCK प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार ने इंडिया टुडे से कहा, 'लोगों की आय बढ़ने, होम लोन सस्ता होने और अपने निवेश पोर्टफोलियों को बढ़ाने के लिए दूसरे घरों की मांग में बढ़ोतरी हो रही है. इनमें से ज्यादातर सोचते हैं कि किराये की आय बेहतर विकल्प है. कंपनी के सर्वे में करीब 53 फीसदी लोगों ने कहा कि वे किराये की आय के लिए आवासीय संपत्ति में निवेश के इच्छुक हैं.'

2019 में सरकार ने दीर्घकालिक निवेशकों को लुभाने के लिए प्रोत्साहन दिया है. उदाहरण के लिए, किराये की आय पर टीडीएस की सीमा को बढ़ाकर 1.8 लाख से 2.4 लाख कर दिया है. यह संभवत: निवेशकों को किराये की आय के लिए दूसरा घर खरीदने के लिए आकर्षित करने के प्रयास के तहत किया गया है. इसके अलावा दूसरे घर पर लगने वाले टैक्स से भी छूट दे दी गई है ताकि लोगों को एक से ज्यादा घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

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