वेंकैया नायडू ने शुक्रवार सुबह 10 बजे भारत के 13वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली. उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई. आंध्र प्रदेश के रहने वाले 1 जुलाई 1949 को जन्मे वेंकैया नायडू 68 वर्षीय ऐसे पहले उपराष्ट्रपति हैं, जिनका जन्म देश की आजादी के बाद हुआ था.
वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद यह भी पहली बार हुआ है कि देश में चारों सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बीजेपी के नेता मौजूद हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन सभी बीजेपी से हैं. कई लोगों ने यह बात गौर किया कि अब राष्ट्रपति भवन के जलपान में सिर्फ शाकाहारी चीजें ही मौजूद थीं.
उपराष्ट्रपति बनने से पहले वेंकैया नायडू मोदी कैबिनेट में शहरी विकास मंत्रालय का काम संभाल रहे थे. उससे पहले वेंकैया नायडू दो बार बीजेपी के अध्यक्ष और एक बार BJP के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं.
शांत और सौम्य स्वभाव के लिए जाने वाले वेंकैया नायडू के शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के तमाम नेता तो मौजूद थे ही, विपक्ष के भी बहुत से नेता मौजूद थे. BJP के सभी मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह में आए थे, लेकिन सबसे ज्यादा लोगों की निगाहें नीतीश कुमार पर लगी थी जो हाल में ही विपक्ष का खेमा छोड़कर एनडीए के साथ आए हैं. नीतीश कुमार आगे से तीसरी पंक्ति में बीजेपी के दूसरे मुख्यमंत्रियों के साथ बैठे थे. उनके बगल में वसुंधरा राजे और देवेंद्र फडणवीस बैठे थे. कार्यक्रम शुरू होने से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह काफी देर तक नीतीश कुमार के साथ बातचीत करते हुए दिखे.
शपथ ग्रहण समारोह में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आए थे. लेकिन वह कार्यक्रम में कुछ देर से आए और मुख्यमंत्री वाली लाइन में सबसे आखिर में किनारे पर जाकर बैठे. केजरीवाल की मेनका गांधी के अलावा किसी से ज्यादा बातचीत नहीं हुई और वह कार्यक्रम समाप्त होते ही फौरन बाहर निकल गए.
जब लालकृष्ण आडवाणी दरबार हॉल में आए और सबसे आगे की पंक्ति में जाकर बैठे तो वेंकैया नायडू ने पास जाकर झुक कर उन्हें नमस्कार किया.
वेंकैया नायडू के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री तो नहीं आया, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, मुलायम सिंह यादव, डेरेक ओ ब्रायन और डी राजा समेत विपक्ष के नेता मौजूद थे.
नीतीश कुमार से शरद यादव के बागी तेवरों के बारे में सवाल पूछा गया लेकिन नीतीश चुपचाप मुस्कुराते हुए बिना जवाब दिए निकल गए.
बालकृष्ण