NH 74 घोटाला: यूपी-उत्तराखंड में अधिकारियों-किसानों की संपत्तियां जब्त, मुआवजे में हुआ था हेरफेर

प्रवर्तन निदेशालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग 74 को चौड़ा करने से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में 21.96 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त की है. जब्त संपत्तियां विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारियों, भूमि मालिकों, किसानों और बिचौलियों की हैं.

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प्रवर्तन निदेशालय (फाइल फोटो- ANI) प्रवर्तन निदेशालय (फाइल फोटो- ANI)

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 19 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

  • एनएच-74 घोटाला मामले में कार्रवाई
  • जब्त की गईं 21.96 करोड़ की संपत्ति

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय राजमार्ग 74 को चौड़ा करने से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में 21.96 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त की है. ईडी के मुताबिक ये जब्त संपत्तियां विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारियों (एसएलएओ), भूमि मालिकों, किसानों और बिचौलियों की हैं.

ये संपत्तियां प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत जब्त की गई हैं. संघीय जांच एजेंसी के मुताबिक, जब्त की गई संपत्तियों में से 36 अचल संपत्तियां हैं. इसमें कृषि भूमि, औद्योगिक भूमि, कॉमर्शियल प्लॉट, और इमारतें हैं. ये उत्तराखंड के देहरादून और ऊधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के रामपुर जिलों में स्थित हैं.

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चल संपत्तियों में 11 बैंक खाते डिपोज़िट और म्यूचुअल फंड शामिल हैं. पीएमएलए के तहत एंजेंसी ने ये जांच उत्तराखंड पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर की. ये एफआईआर और चार्जशीट दिनेश प्रताप सिंह और अन्य राजस्व अधिकारियों, किसानों और बिचौलियों के खिलाफ दर्ज की गई थी.

चार्जशीट के मुताबिक ‘दिनेश प्रताप सिंह और अनिल शुक्ला (तत्कालीन SLAO’S)  जमीन अधिग्रहण के लिए तब सक्षम अधिकारी के तौर पर काम कर रहे थे और उन्होंने अन्य जनसेवकों, किसानों और बिचौलियों के साथ साजिश रची. ये सब गैर कृषि दर पर मुआवजा देकर सरकारी फंड के दुरुपयोग के उद्देश्य से किया गया.’  

ईडी ने कहा, 'गैर कृषि दर पर मुआवजा कृषि दर से बहुत ज्यादा था. ये बड़ा मुआवजा पुरानी तिथि के आदेश के आधार पर दिया गया. ये आदेश उत्तर प्रदेश जमींदारी और भूमि सुधार एक्ट, 1950 (UP ZA & LR एक्ट) के सेक्शन 143 के आधार पर था, जिसके तहत भूमि का उपयोग (लैंड यूज) कृषि से गैर कृषि में बदला जा सकता था. इसके लिए राजस्व रिकॉर्डों में बैंक डेट एंट्री करके फर्जी दस्तावेज को असली दस्तावेज की तरह पेश किए गए. इस तरह बड़ा हुआ मुआवजा बांटने से सरकारी खजाने को 215.11 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.' 

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ईडी के दावे के मुताबिक पीएमएलए के तहत उसकी जांच से सामने आया कि जिन किसानों और जमीन मालिकों को गलत तरीके से बढ़ा हुआ मुआवजा मिला. उन्होंने अतिरिक्त मिली रकम से चल संपत्तियां खरीदने के अलावा बैंक में डिपाजिट किए. साथ ही राजस्व और अन्य अधिकारियों को कमीशन का भुगतान किया.

​राजस्व के घाटे की भरपाई के लिए अभी ईडी की ओर से ऐसी और संपत्तियों की पहचान की जा रही है जिन्हें इस घोटाले के पैसे से खरीदा गया.

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