भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का मंगलवार को पदभार ग्रहण करने के बाद ओपी रावत ने कहा कि 'एक देश एक चुनाव' कराने के लिए चुनाव आयोग तैयार है. बशर्ते कि इसके लिए कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर ली जाए. उन्होंने कहा कि ये चुनौतीपूर्ण जरूर होगा, लेकिन भारत जैसे देश के लिए असंभव कुछ भी नहीं है. ओपी रावत ने कहा कि इसके लिए पहले पूरे देश में आम सहमति बनानी होगी. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का विचार कैसा है तो उन्होंने इसके ऊपर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनकी जिम्मेदारी चुनाव कराने की है और वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते.
हाल ही में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता समाप्त करने का चुनाव आयोग का फैसला काफी सुर्खियों में रहा. ओपी रावत ने चुनाव आयुक्त के तौर पर एक बार आम आदमी पार्टी के मामले से खुद को अलग कर लिया था, लेकिन इस बारे में जो आखिरी फैसला आया उसमें उनके भी दस्तखत थे. क्या ये कदम विरोधाभासी नहीं है इस बारे में पूछे जाने पर रावत ने कहा कि उन्होंने आम आदमी पार्टी के मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने का फैसला इसलिए किया था क्योंकि पार्टी के एक नेता ने उनके ऊपर किसी पार्टी के करीबी होने का आरोप लगाया था.
उन्होंने कहा कि उस वक्त मुझे लगा कि अगर मैं इस सुनवाई से खुद को अलग कर लेता हूं तो शायद आम आदमी पार्टी के लोगों को लगेगा कि उन्हें न्याय मिलने की संभावना ज्यादा है. लेकिन उस वक्त जिस बात को लेकर सवाल उठाया गया था जब उस पर फैसला हो गया तब खुद को इस पूरे मामले से अलग रखने का कोई मतलब नहीं था.
ओपी रावत ने माना कि हाल में चुनाव आयोग के कई फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए चाहे वह गुजरात के चुनाव हो, राहुल गांधी को नोटिस देने का मामला या फिर आम आदमी पार्टी के विधायकों की सदस्यता खत्म करने का. लेकिन उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त के तौर पर उनकी चुनौती यह होगी कि तमाम आरोपों के बावजूद वह निष्पक्षता पूर्ण चुनाव कराने के दायित्व को बखूबी निभा सकें. आरोपों के बारे में उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि अगर उसे कोई चीज गलत लगती है तो इसके बारे में अपने विचार प्रकट करे.
ईवीएम मशीन को लेकर भी पिछले कुछ समय में तमाम सवाल उठे हैं. इस बारे में ओपी रावत ने कहा कि ईवीएम मशीन पर लोगों का भरोसा कायम रहे इसके लिए बहुत से कदम उठाए गए हैं. आने वाले चुनाव वीवीपैट मशीन से होंगे जो ज्यादा पारदर्शी है. उन्होंने कहा कि ईवीएम मशीन को लेकर चुनाव आयोग सभी पार्टियों को लगातार जानकारी देता रहता है ताकि जो कदम उठाए जा रहे हैं उसके बारे में सबको पता चल सके.
मुख्य चुनाव आयुक्त से जब यह पूछा गया कि क्या रिटायर होने के बाद चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्तों को कोई पद लेने से या किसी राजनीतिक पार्टी के साथ जुड़ने से बचना चाहिए ताकि लोगों का ज्यादा भरोसा कायम हो सके तो उन्होंने कहा कि यह गंभीर विषय है जिसके ऊपर विचार होना चाहिए क्योंकि यह सिर्फ किसी पद का सवाल नहीं बल्कि किसी व्यक्ति के अधिकारों का भी सवाल है.
अंकुर कुमार / बालकृष्ण