सुप्रीम कोर्ट की ओर से मंजूर और जारी की गई गाइडलाइन तो यही कहती है. अब देश भर में बगैर पोल्यूशन सर्टिफिकेट वाहनों का बीमा नहीं होगा. इतना ही नहीं पोल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के बगैर इंश्योरेंस रिन्यू भी नहीं होगा. ऐसे ही कई सख्त प्रावधानों वाली गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट ने जारी की. वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट की इस नई गाइडलाइन पर सरकार को अमल करके दिखाना है.
नई गाइडलाइन के मुताबिक इंश्योरेंस कंपनियों को आदेश दिया जाय कि वो भविष्य में इस प्रावधान का सख्ती से पालन करें. ये अलग बात है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में ये स्वीकार किया कि देश भर में अधिकतर वाहन बिना बीमा के भी चल रहे हैं. ये बयान अपने आप में विवादास्पद है कि सरकार ये माने कि जो लाजिमी प्रावधान है उसका ही खुल्लम खुल्ला उल्लंघन हो रहा है और सरकार को पता भी है.
दूसरा बड़ा प्रावधान ये भी है कि सरकार की सिफारिशों को मानते हुए कोर्ट ने इस पर भी हरी झंडी दे दी है कि हरेक पेट्रोल पंप पर प्रदूषण की जांच करने वाली मशीन लगी होगी. इसके कामकाज की निगरानी यानी मॉनिटरिंग और ऑडिट भी होगी. इसमें किसी तरह की कोई धांधली ना हो इसके लिए रियल टाइम चेकिंग का ऑनलाइन सिस्टम भी तैयार किया गया है.
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक उच्चस्तरीय दल बनाने का आदेश दिया था. इसके बाद ईपीसीए का गठन किया गया. इनवॉयरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी ने इस बाबत काफी गहन छानबीन कर रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट को सौंपी. रिपोर्ट में मेडिकल साइंस के शोध की भी जानकारी दी गई. इसके मुताबिक साइंस की मशहूर पत्रिका द लांसेट के मुताबिक हर साल सिर्फ वायु प्रदूषण से दस लाख से ज्यादा भारतीय अकाल मौत के शिकार हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इस पर सख्ती से लगाम ना लगाई गई तो आने वाले समय में हर मिनट में एक मौत का आंकड़ा दोगुना तक हो सकता है. यानी हर घंटे 120 लोग वायु प्रदूषण की वजह से मारे जाएंगे.
अब वाहन प्रदूषण के बारे में सिर्फ दिल्ली एनसीआर की ही बात करें तो रोजाना 85 लाख गाड़ियां सड़कों पर होती हैं. 35 लाख से ज्यादा गाड़ियां तो सिर्फ दिल्ली में ही होती हैं. अब एक कार एक घंटा सड़क पर दौड़ती है तो इसके धुएं से 48 ग्राम पीएम और 30 ग्राम सल्फर डायऑक्साइड निकलता है.
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वॉयरमेंट की निदेशक और ईपीसीए की सदस्य सुनीता नारायण ने कहा कि ये देश के लिए बड़ा दिन है. इस पूरे मामले में मॉनिटरिंग और ऑडिट का काम काफी चुनौती भरा होगा. इसमें आम जनता की भागीदारी ज्यादा जरूरी है.
नंदलाल शर्मा