भारतीय जनता पार्टी के सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने मंगलवार को राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और राजीव गांधी को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, कि कांग्रेसी सांसदों ने जमकर हंगामा किया. माफी की मांग करते हुए कांग्रेसी सांसद वेल में आ गए. सदन की कार्यवाही में व्यवधान पड़ता देख उपसभापति हरिवंश विपक्ष को आश्वस्त करते रहे कि रूल बुक का अवलोकन करने के बाद ही टिप्पणियों को कार्यवाही में शामिल किया जाएगा. विपक्षी सांसद इतने पर भी नहीं माने. अंत में जीवीएल को अपना बयान वापस लेना पड़ा.
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जीवीएल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सन 1952 और 1954 के लोकसभा चुनाव में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को चुनाव हराने के लिए आक्रामक प्रचार किया था. ऐसा इसलिए कि बाबा साहब को सदन में देखना उन्हें पसंद नहीं था. उन्होंने राजीव गांधी पर भी टिप्पणी की. उनकी इस टिप्पणी के बाद विपक्षी नेता नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए.
गुलाम नबी आजाद ने टिप्पणी को बताया निंदनीय
नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमने कभी अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर कभी कोई गलत टिप्पणी नहीं की. यदि हम पीएम मोदी के खिलाफ कुछ बोलते हैं तो वह जवाब देने में सक्षम हैं. लेकिन जो लोग आज इस दुनिया में नहीं हैं, उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी करना निंदनीय है.
आजाद ने बीजेपी सांसद के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इतिहास हमने भी पढ़ा है और इस तरह आप तोड़-मरोड़ कर इतिहास का इस्तेमाल उच्च सदन में करना ठीक नहीं. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि पूरे सत्र में सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न न हो, लेकिन अगर सरकार खुद ही सदन नहीं चलने देना चाहेगी तो ऐसा कैसे संभव होगा.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि नेहरू कांग्रेस के नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के बड़े नेता रहे हैं. देश की नींव रखने का श्रेय पंडित नेहरू को जाता है. उनके लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना गलत है. हम पूर्व प्रधानमंत्री जो इस दुनिया में नहीं है, उनके बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करें.
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