केरल HC के जज ने पूछा- मुस्लिम महिलाएं चार-चार शौहर क्यों नहीं रख सकतीं?

मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पुरुष चार बार शादी कर सकते हैं. हालांकि कई इस्लामिक देशों ने इस पर पाबंदी लगा दी है, लेकिन भारत में यह नियम लागू है.

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जस्टि‍स बी. पाशा ने धर्मगुरुओं की मंशा पर उठाए सवाल जस्टि‍स बी. पाशा ने धर्मगुरुओं की मंशा पर उठाए सवाल

स्‍वपनल सोनल

  • कोझिकोड,
  • 07 मार्च 2016,
  • अपडेटेड 7:45 PM IST

केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस बी. कमल पाशा ने धर्मगुरुओं की मंशा और मुस्लि‍म महिलाओं के अधि‍कारों को लेकर रविवार को कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि मुस्लि‍म पर्सनल लॉ के मुताबिक, अगर पुरुष चार-चार शादियां करने का हक रखता है तो फिर महिलाएं चार-चार शौहर क्यों नहीं रख सकतीं?

जस्ट‍िस पाशा कोझि‍कोड में महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे एक गैर सरकारी संगठन के कार्यक्रम में शि‍रकत कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा, 'मुस्लिम पर्सनल लॉ में ऐसे कानूनों की भरमार है, जो महिलाओं के खिलाफ हैं. इसके लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठे धर्म के ठेकेदार जिम्मेदार हैं.'

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बता दें‍ कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पुरुष चार बार शादी कर सकते हैं. हालांकि कई इस्लामिक देशों ने इस पर पाबंदी लगा दी है, लेकिन भारत में यह नियम लागू है.

'आत्मचिंतन करें धर्म प्रमुख'
जस्टिस पाशा ने धर्मगुरुओं की भूमिका को रखांकित करते हुए कहा, 'धर्म प्रमुखों को आत्मचिंतन करना चाहिए कि क्या उन्हें एकतरफा फैसले देने के हक है? आम लोगों को भी सोचना चाहिए कि ये लोग कौन हैं जो ऐसे फैसले सुनते हैं?'

उन्होंने आगे कहा कि पर्सनल लॉ ने कई विसंगतियां हैं. महिलाओं को समानता का अधिकार नहीं दिया गया है. साथ ही प्रॉपर्टी और अन्य मसलों में भी उनका हक छीना गया है.

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