‘सीलबंद लिफाफे में नहीं छुपेगा सच’, कश्मीर पर SC की टिप्पणी का कांग्रेस ने किया स्वागत

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने SC के फैसले पर कहा कि अदालत ने कश्मीर के लोगों के दिल की बात कही है, जिसका पूरा देश इंतजार कर रहा था.

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कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद (फोटो: PTI) कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद (फोटो: PTI)

अशोक सिंघल

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
  • SC ने इंटरनेट पाबंदी पर की थी कड़ी टिप्पणी
  • कोर्ट ने कही लोगों के मन की बात: गुलाम नबी आजाद

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जम्मू-कश्मीर में लगी पाबंदियों पर सख्त टिप्पणियों के बाद कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने SC के फैसले पर कहा कि अदालत ने कश्मीर के लोगों के दिल की बात कही है, जिसका पूरा देश इंतजार कर रहा था. उनके अलावा रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर लिखा कि अब सच को लिफाफे में बंद नहीं किया जाएगा.

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नबी आजाद ने साधा सरकार पर निशाना

गुलाम नबी आजाद का कहना है कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के दो हिस्से कर दिए थे, पर्यटकों को बाहर निकाला गया, नेताओं को नज़रबंद कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने जनता के हितों की बात की है. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया सरकार ने घाटी की पहचान को खत्म करने का काम किया.

सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद करने की वजह से शिक्षा, व्यापार का भारी नुकसान हुआ था. लोगों को जरूरी चीज़ें नहीं मिल पा रही थीं, ऐसे में अदालत का फैसला आम लोगों की बात कहता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अदालत के फैसले का स्वागत करती है.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्वीट कर सर्वोच्च अदालत के फैसले पर टिप्पणी की. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि मोदी-शाह की सरकार के पास अब सिर्फ एक हफ्ता बचा है कि वो इंटरनेट बैन के फैसले का रिव्यू करें. अब सच को सीलबंद लिफाफे में नहीं छुपाया जा सकता है.

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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पाबंदियों पर कड़ी टिप्पणी की. इस दौरान धारा 144, इंटरनेट पाबंदी के रिव्यू को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया है. सरकार के द्वारा लिए गए फैसलों को एक हफ्ते के अंदर सार्वजनिक करना होगा. सर्वोच्च अदालत ने ये भी कहा कि लंबे समय तक धारा 144 लगाना, इंटरनेट पर पाबंदी रखना सत्ता का दुरुपयोग करना है.

जम्मू-कश्मीर को लेकर पर बोले केसी त्यागी

वहीं जेडीयू नेता केसी त्यागी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने आजतक से बातचीत में कहा, 'जम्मू कश्मीर में जो भी राजनीतिक बंदी हैं उनको रिहा किया जाना चाहिए. साथ ही सरकारी आदेश के जो निर्णय है वह जुडिशल रिव्यु के दायरे में आते हैं. उसी के तहत यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है. मैं उसका स्वागत करता हूं.'

आगे उन्होंने कहा, 'यह अफसोस है कि आपातकाल में इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे. हम सब लोग जो एनडीए के लोग हैं उन प्रतिबंधों से लड़े थे इसलिए इस सरकार के तहत कोई इस तरह का काम ना होना चाहिए. जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पॉलीटिकल प्रिजनर की रिहाई हो और जो भी डेमोक्रेटिक जरूरतें हैं उसको पूरा किया जाना चाहिए.'

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केसी त्यागी ने कहा कि आतंकवाद के हम विरोधी रहे हैं. सीमाओं पर जो हमारे फौजी तैनात हैं हम उनके साथ हैं लेकिन जो मानवाधिकार हैं उसका वायलेशन नहीं होना चाहिए.

विदेशी राजनयिकों के बारे में जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद कई विदेशी संस्थाएं इसका विरोध कर रही थी जिसके लिए उनको भेजा गया था. इससे पहले भी एक डेलिगेशन को घुमाया गया था.

जेएनयू पर बोले केसी त्यागी

केसी त्यागी ने कहा कि जेएनयू के वीसी को अविलंब प्रभाव से हटाया जाना चाहिए.  जेएनयू में जो भी परिस्थितियां बनी हैं उसके लिए जेएनयू के वाइस चांसलर जिम्मेदार हैं. शुरू में फीस वृद्धि को लेकर के इस तरीके का बवाल हुआ था. आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि जेएनयू में नकाबपोश गुंडे इस तरीके से घुसे हैं. मुझे लगता है इन तमाम परिस्थितियों के लिए सिर्फ और सिर्फ वीसी जिम्मेदार हैं. जैसा कि मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि उनकी मांग जो है वह महत्वपूर्ण मांग है और अविलंब प्रभाव से उनको हटाया जाना चाहिए.

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